‘PM Modi के राज में पाकिस्तान में भी होगा हनुमान चालीसा का पाठ’, बोले देवेंद्र फडणवीस

Devendra Fadnavis

ANI

फडणवीस ने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों ने यह (प्रतिबंध) किया, जनता अब उन्हें घर बैठा देगी। उन्होंने कहा, “हम इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। यहां राम, हनुमान और छत्रपति शिवाजी के नाम का पाठ किया जाएगा।”

अमरावती में दहीहांडी कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक दिन पाकिस्तान में भी हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा को हनुमान चालीसा का पाठ करने पर 12 दिनों की जेल हुई। मंत्री ने पूछा, क्या कोई हनुमान चालीसा का पाठ करने पर किसी को जेल में डालता है? उपमुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए पूछा कि वे किस तरह के लोग हैं, हनुमान चालीसा पढ़ने पर किसी को जेल कैसे हो सकती है और भारत में हनुमान चालीसा पढ़ने पर कोई प्रतिबंध कैसे लगा सकता है। 

फडणवीस ने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों ने यह (प्रतिबंध) किया, जनता अब उन्हें घर बैठा देगी। उन्होंने कहा, “हम इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। यहां राम, हनुमान और छत्रपति शिवाजी के नाम का पाठ किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि 2 दिन पहले उद्धव ठाकरे स्टालिन के साथ बैठे थे। उन्हीं स्टालिन के बेटे ने हिंदू धर्म (सनातन धर्म) की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना वायरस से की थी। उन्होंने सनातन धर्म को ख़त्म करने का आह्वान किया था। आज मैं यहां से कहना चाहूंगा कि किसी में इतनी ताकत नहीं है कि वह हिंदू धर्म को नष्ट कर सके। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हिंदू धर्म को नष्ट करने के लिए हिंदुस्तान पर हमला किया, वे स्वयं नष्ट हो गए।

भाजपा नेता ने कहा, “जो लोग हिंदू धर्म को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि जब तक इस देश में एक भी हिंदू जीवित है, हिंदू धर्म का झंडा दुनिया में लहराता रहेगा और इसे कोई नहीं रोक सकता।” इससे पहले नागपुर की एक अदालत ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 2014 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दाखिल चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा न करने के आरोपों से शुक्रवार को बरी कर दिया था। दीवानी न्यायाधीश एस एस जाधव ने कहा कि अदालत ने डिजिटल तरीके से उपस्थित फडणवीस को ‘‘दोष मुक्त’’ कर दिया है। न्यायाधीश ने कहा कि प्रासंगिक जानकारी को छिपाने का उनका कोई ‘‘इरादा’’ नहीं था।

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