दिल, दिमाग और पेट का कहना (व्यंग्य)

कुछ महीने पहले उन्होंने मनपसंद कार का टॉप मॉडल खरीदा। बारिश के समय अपने आप चलने…

किस्मत का बाज़ार (व्यंग्य)

देश के कर्मठ, नामी व्यवसायी द्वारा सप्ताह में सत्तर घंटे काम करने की बात पर बातें…

भावना, सदभावना, दुर्भावना (व्यंग्य)

भौतिक युग में सम्प्रेषण इतना बढ़ गया है कि साथ साथ बैठे दो लोगों का बतियाना…

World Book Fair: पुस्तकों के प्रति रूचि बढ़ाता विश्व पुस्तक मेला

नई दिल्ली में प्रतिवर्ष नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा एक विशेष थीम के साथ एशिया के…

पहले चालान के क्या कहने (व्यंग्य)

पिछली सदी की बात करें तो कोई वाहन चालक अनजाने में या जानबूझकर ट्रैफिक नियमों का…

प्रॉमिस डे के चोंचले (व्यंग्य)

सुनते हो प्रॉमिस डे, तुम मेरे लिए रोमांटिक छुट्टी हो। जहाँ लोग पल भर में प्यार…

बातें वेलेंटाइन की (व्यंग्य)

उनका नाम चिंतामणि है। हमेशा चिंता करते रहते हैं। उनकी चिंता के चलते उनका गंजा सिर…

निब्बा-निब्बी का वैलेंटाइन वीक (व्यंग्य)

वैलेंटाइन वीक, निब्बा-निब्बी की खुमारी के लिए सदैव से चोंचलों का स्वर्णयुग रहा है। निब्बा का…

पुस्तक मेले के बारे उदगार (व्यंग्य)

लेखकों, किताबों, प्रकाशकों व जुगाड़ुओं का मेला फिर आ गया। फेसबुक, व्हाट्सेप, अखबार और एंटीसोशल मीडिया…

जब हम गए विदेश (व्यंग्य)

भारतीय जीवन से विदेश का आकर्षण कभी खत्म नहीं होता। आजकल तो जो हिन्दुस्तानी बंदा विदेश…