टोपी पहनाने वाले (व्यंग्य)

Prabhasakshi नेताजी सिगरेट का कश लगाते हुए बड़े इत्मिनान के साथ कहा– देखो सेक्रेटरी! यह जनता…

हम काले हैं तो क्या हुआ (व्यंग्य)

ऐसे ही एक अन्य सत्पुरुष हैं अधिकारी जी। सत्पुरुष हैं इसलिए सहृदय हैं और समाज में…

महंगाई डायन खाए जात है (व्यंग्य)

मौसी! वेदों-पुराणों में लिखा है कि देशभक्ति तन-मन-धन से की जानी चाहिए। तन तो हमारे पास…

इधर के हुए न उधर के (व्यंग्य)

बच्चे खुसुर-फुसुर करने लगे। एक बच्चे ने दूसरे से कहा, यह कैसी हिंदी कक्षा है। केवल…

थोड़ा रोना ज़रूरी होता है (व्यंग्य)

पिछले दिनों जनसभाओं में तरह तरह के नेताओं की आंखों से भावना जल बह निकला जिससे…

इंसान से आगे नहीं रोबोट (व्यंग्य)

अमेरिकाजी के संस्थानों ने रिसर्च का तेल निकालने के बाद पाया है कि रोबोट्स इंसानों की…

संतुष्टि एक स्वादिष्ट वस्तु है (व्यंग्य)

काफी सकारात्मक बातों के माहौल में बताना चाहता हूं कि मेरे, अन्दर से तुच्छ मगर बाहर…

कागजी शेर, मैदान में हुए ढेर (व्यंग्य)

प्रशंसक दो मिनट के लिए चुप बैठता है और फिर कहता है- “तुम्हारी ये सेमी-फाइनल, फाइनल…

गुरु ठनठनलाल हुए अपडेट (व्यंग्य)

चेला! हम तुम्हारी गुरुभक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। नहीं तो हमारे आसपास ऐेसे भी चेले हैं…

जेब और इज्जत (व्यंग्य)

पत्रकार ढीठ था। उसने पूछा– फिर सरकार आपके खिलाफ क्यों है? साहब ने कहा– इसलिए कि…