राजस्थान चुनाव: टिकट मिल गई तो हार का डर, नहीं मिली तो तानों की बरसात

हाइलाइट्स

राजस्थान विधानसभा चुनाव अपडेट
प्रत्याशियों और दावेदारों के हो रहे बुरे हाल
शेर-ओ-शायरी कर बता रहे हैं दिल का हाल

जयपुर. राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकटों के लिए मची आपाधापी के बीच कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिनको टिकट तो मिल गया लेकिन उन्हें हार का डर सता रहा है. कुछ ऐसे हैं जिनको बगावत की चिंता खाए जा रही है. कुछ ऐसे हैं दावेदार हैं जिनको टिकट नहीं मिला तो उनको जालिम दुनिया इतने ताने दे रहे है कि वे अब बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं. कई ऐसे भी है जिनको पार्टियों ने दरकिनार कर दिया वे भी दुखी हैं. लिहाजा कोई रो रहा है तो कोई दुखभरी शेर-ओ-शायरी कर अपना गम हलका कर रहा है. एक प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो शेर-ओ-शायरी कर बगावत करने वालों को चुनौती दे रहे हैं. ये सब किस्से सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं.

कांग्रेस ने जयपुर की मालवीय नगर विधानसभा सीट से लगातार दो चुनावी हार के बावजूद डॉक्टर अर्चना शर्मा पर फिर एतबार जताया है. अर्चना तीसरी बार टिकट लाने में तो कामयाब हो गई लेकिन अब नतीजे का डर सता रहा है. हाल ही में उन्होंने अपने चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया तो बोलते बोलते रो पड़ीं. यह कहते कहते गला रूंध गया कि इस बार हार गई तो राजनीतिक करियर ही चौपट हो जायेगा.

राजस्थान चुनाव: टिकट मिल गई तो हार का डर, नहीं मिली तो तानों की बरसात, यूं निकाल रहे दिल का गुबार

मुरावतिया का पार्टी ने टिकट काटा
वहीं दो बार मकराना से विधायक रहे रूपाराम मुरावतिया का पार्टी ने टिकट काट दिया. अब जनता पूछ रही है नेताजी टिकट कैसे कटा? किस को क्या जवाब दे. क्या बोलें? इसलिए दिल का हाल गीत के जरिये बयां किया. सोशल मीडिया पर मुरावतिया का हाल-ए-दिल जमकर वायरल हो रहा है.

जोगेश्वर गर्ग विरोधियों को ललकार रहे हैं
बीजेपी के विधानसभा में सचेतक और जालोर से विधायक जोगेश्वर गर्ग पार्टी का टिकट लाने में तो कामयाब हो गये लेकिन विरोधियों को उनकी उम्मीदवारी पच नहीं रही है. कइयों ने उनके सामने ताल ठोकने का ऐलान कर दिया है. लिहाजा नेताजी ने एक शेर के जरिये विरोधियों को ललकार कर जनता का भरोसा भी हासिल करने का प्रयास किया है.

सगीर अहमद को दोनों ही पार्टियां नहीं पूछ रही है
दोनों ही इन सबके बीच सगीर अहमद ऐसे नेता हैं जो बदले दौर की राजनीति के साथ तालमेल नहीं बैठा पाये. धौलपुर से बीजेपी के विधायक रहने के बावजूद अब न कांग्रेस पूछ रही और न भाजपा. लिहाजा अब शेर-ओ-शायरी का ही साथ बचा है. सियासत के हालात देख पूर्व विधायक के भीतर बैठा शायर कुछ गुनगुनाने लगता है. हकीकत बयां करने लगता है.

अग्नि परीक्षा का समय है चुनाव
नेताओं के लिए चुनाव का समय अग्नि परीक्षा का होता है. जनता के इम्तिहान में पास हो गये तो पांच साल हुक्म चलता है. हुकूमत आने पर मंत्री तक बनने का भी मौका मिल जाता है. टिकट कटने पर या तो अपमान का घूंट पीना पड़ता है या फिर जिनमें दमखम हैं वो बगावत का झंडा बुलंद कर लेते हैं. सबसे मुश्किल दौर बुढापे का है. अप्रासंगिक हो गये तो कोने में बैठकर सियासी तमाशा देखने के अलावा कोई विकल्प  नहीं बचता. इसीलिए तो कहा जाता है कि राजनीति में जो जहां फिट है वो हिट हो जाता है. गम और खुशी का तो सियासत में सरकारों के बदलने की तरह आना जाना लगा रहता है.

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