Rampur में खत्म हो रहा आजम खान का दबदबा! उपचुनाव में भाजपा के जीत के क्या है मायने

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गुरुवार को रामपुर में हुए उपचुनाव के नतीजे आए। जिस आकाश सक्सेना को हाल में ही विधानसभा चुनाव में आजम खान ने परास्त किया था। वही, आकाश सक्सेना इस बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और आजम खान के बेहद करीबी माने जाने वाले आसिम रजा को 34136 वोटों से हराया है।

रामपुर की चाकू को विश्व प्रसिद्ध माना जाता है। वैसे ही राजनीति में जब भी रामपुर की बात होती थी तो इसमें आजम खान का नाम सबसे पहले आता था। रामपुर और आजम खान को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता है। समाजवादी पार्टी की सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले आजम खान इन दिनों कई मुश्किलों से गुजर रहे हैं। व्यक्तिगत मुश्किलें तो है ही, इसके साथ अब राजनीतिक मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। रामपुर में आजम खान का दबदबा पिछले 45 सालों से बरकरार रहा है। लेकिन, यह इतिहास में पहला मौका आया है जब उन्हें उनके ही घर में पटखनी खानी पड़ी है। पहले लोकसभा उपचुनाव में और अब विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को हराया है। इसके साथ ही अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या रामपुर से आजम खान का दबदबा कम होने लगा है?

गुरुवार को रामपुर में हुए उपचुनाव के नतीजे आए। जिस आकाश सक्सेना को हाल में ही विधानसभा चुनाव में आजम खान ने परास्त किया था। वही, आकाश सक्सेना इस बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और आजम खान के बेहद करीबी माने जाने वाले आसिम रजा को 34136 वोटों से हराया है। रामपुर मुस्लिम बहुल इलाका है। रामपुर में पहली बार कमल खिला है। इतना ही नहीं, रामपुर से पहली बार हिंदू समुदाय का कोई विधायक बना है। 1980 से रामपुर में आजम खान का दबदबा देखने को मिला है। तेरहवीं विधानसभा में यहां से कांग्रेस जीतने में कामयाब जरूर हुई थी। लेकिन उसके बाद से फिर आजम खान का रुतबा यहां देखने को मिला। आजम खान खुद यहां से 10 बार विधायक रह चुके हैं। वहीं एक बार उनकी पत्नी तंजीम फातिमा भी उपचुनाव में जीत हासिल कर चुकी हैं।

रामपुर में चुनावी जीत के लिए आजम खान की पूरी दमखम लगा रहे थे। लेकिन नतीजा उनके पक्ष में दिखाई नहीं दिया। आजम खान ने यहां पर धार्मिक कार्ड भी खेला, वह भी नहीं चल पाया। लगातार अपने शब्दों के जरिए आजम खान रामपुर में अपनी सियासत को बचाने की कोशिश कर रहे थे। मुस्लिम, यादव और दलित वोटों को लामबंद करने के लिए अखिलेश यादव और चंद्रशेखर ने भी रामपुर में प्रचार किया। बावजूद इसके भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीत हासिल की। इसके बाद रामपुर में आजम खान की वजह से समाजवादी पार्टी का जो ग्राफ थास उस में भारी गिरावट भी दर्ज की गई। 1980 में पहली बार विधायक बनने के बाद आजम खान का राजनीतिक ग्राफ लगातार बढ़ता रहा। फिर धीरे-धीरे सूबे के बड़े मुस्लिम चेहरों में शामिल हो गए। अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी वे राजनीति में ले आए। 

लेकिन आजम खान के सियासी करियर ने उस समय करवट लेनी शुरू कर दी जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। आजम खान के खिलाफ कई मुकदमे शुरू हुए, कुछ में बरी होते तो कुछ में सजा हो जाती। परिस्थितियां लगातार आजम खान के खिलाफ होते चली गई। आलम यह हुआ कि 2019 में रामपुर में लोकसभा चुनाव जीतने वाले आजम खान को यहां लोकसभा उपचुनाव में हार देखना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करने वाले आजम खान को ठीक 6 महीने बाद उपचुनाव में हार मिली। भाजपा ने भी रामपुर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रचार करने पहुंचे थे। इसके अलावा केशव प्रसाद मौर्य बृजेश पाठक वहां डेरा जमाए हुए थे। 

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