आजकल देखने में आ रहा है कि एक खास धर्म से जुड़े उपदेशकों की ओर से भड़काऊ भाषण दिये जाते हैं, विवाद खड़ा हो जाता है तो कह दिया जाता है कि हमने कुछ गलत नहीं कहा। ऐसे उपदेशकों का संपर्क तंत्र इतना दुरुस्त है कि यदि इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस इन तक पहुँचे तो यह तुरंत लोगों की भीड़ एकत्रित कर लेते हैं, सोशल मीडिया पर तमाम तरह की पोस्टें डलवाने लगते हैं और अपने धर्म के प्रमुख लोगों से अपने पक्ष में बयान दिलवाने लगते हैं ताकि यह प्रदर्शित हो सके कि उन पर अत्याचार किया जा रहा है। ऐसा ही मामला रविवार को मुंबई से तब सामने आया जब गुजरात पुलिस ने इस्लामी उपदेशक मुफ्ती सलमान अजहरी को गिरफ्तार किया। भड़काऊ भाषण के एक मामले की जांच कर रही गुजरात एटीएस जब रविवार को मुंबई में इस्लामी उपदेशक मुफ्ती सलमान अजहरी के आवास पर पहुँची तो वहां उनके समर्थकों की ओर से हंगामा खड़ा कर दिया गया। पुलिस को देख अजहरी खिड़की से अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए सफाई देने लगा।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक मुफ्ती सलमान अजहरी के सैंकड़ों समर्थक उनकी तत्काल रिहाई की मांग को लेकर घाटकोपर पुलिस थाने के बाहर जमा हो गए जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए हल्के लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस कारण इलाके में यातायात जाम हो गया। बाद में गुजरात पुलिस की टीम मुफ्ती सलमान अजहरी को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रवाना हो गई। हम आपको बता दें कि गुजरात के जूनागढ़ की पुलिस ने इस्लामी उपदेशक मुफ्ती सलमान अजहरी द्वारा दिये गये भड़काऊ भाषण के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस सिलसिले में दो लोगों को शनिवार को गिरफ्तार किया था। उसके बाद रविवार को गुजरात पुलिस की एटीएस इस्लामी उपदेशक मुफ्ती सलमान अजहरी को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पहुंची थी। हम आपको बता दें कि अजहरी का यह जहरीला भाषण 31 जनवरी की रात को जूनागढ़ के ‘बी’ डिवीजन पुलिस थाने के पास एक खुले मैदान में आयोजित कार्यक्रम में दिया गया था। भड़काऊ भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अजहरी और स्थानीय आयोजकों मोहम्मद यूसुफ मलिक और अजीम हबीब ओडेदरा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153बी और 505 (2) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
हम आपको यह भी बता दें कि पुलिस कार्रवाई के बाद घबराये अजहरी ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने हमारे बयान पर ट्वीट किया है और कहा है कि हम हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का काम करते हैं। अजहरी ने अपनी पोस्ट में कहा है कि हमारे बयान में एक कविता का जिक्र है जिसे आपको ध्यान से सुनना चाहिए कुछ देर की खामोशी है फिर शोर आएगा, आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा। अजहरी ने हका है कि पूरे बयान में कहीं भी हिंदू शब्द नहीं है और ना ही इसमें किसी समूह पर निशाना साधा गया है लेकिन बीजीपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसमें जबरन हिंदू शब्द डाला है और हिंदुओं को कुत्ता कहा है, इसलिए सभी हिंदुओं को इस नफरत फैलाने वाले प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
इससे पहले गुजरात पुलिस ने बताया था कि भड़काऊ भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अजहरी और स्थानीय आयोजकों मोहम्मद युसुफ मलिक और अजीम हबीब ओडेदरा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 बी (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (2) (सार्वजनिक उत्पात के लिए अनुकूल बयान देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने मलिक और हबीब को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अजहरी को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों ने सभा के लिए पुलिस से यह कहते हुए अनुमति ली थी कि अजहरी धर्म के बारे में बात करेगा और नशामुक्ति के बारे में जागरूकता फैलाएगा। लेकिन उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया।’’
दूसरी ओर अजहरी की गिरफ्तारी से भड़के एआईएमआईएम नेताओं ने आरोप लगाया है कि गुजरात पुलिस ने नियमों के विपरीत गिरफ्तारी की है। पार्टी नेता वारिस पठान ने कहा कि हमें उम्मीद है कि न्यायालय न्याय देगा और प्रशासन पूरी पारदर्शिता से काम करेगा। बहरहाल, अजहरी के खिलाफ जिस प्रकार की कार्रवाई हुई है वह स्वागतयोग्य है। भड़काऊ भाषण देकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वालों की असली जगह जेल ही है। यहां एक बात सभी को और समझने की जरूरत है कि धर्म से ऊपर राष्ट्र और संविधान है।