Prabhasakshi NewsRoom: G-20 Summit में Russia को घेरने की तैयारी में हैं कई देश, भारत का रुख क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और इंडोनेशिया में प्रवासी भारतीय के एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। हालांकि मोदी चीन के राष्ट्रपति शी से मुलाकात करेंगे या नहीं अभी यह स्पष्ट नहीं है।

इंडोनेशिया के बाली में 15-16 नवंबर को होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए मंच सज चुका है, सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और वैश्विक नेताओं के पहुँचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव यहां चर्चा का प्रमुख विषय रहेगा। ऐसे में भारत का रुख देखने वाला होगा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस विरोधी कई प्रस्तावों के दौरान भारत अनुपस्थित रहा है। इसके अलावा महामारी के बाद आयोजित हो रही इस वैश्विक बैठक में कई बड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच आज होने वाली एक बैठक पर भी सभी की नज़रें हैं। हम आपको याद दिला दें कि अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी के अगस्त में ताइवान की यात्रा करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध और खराब हो गए थे। चीन ने इसे उकसाने वाला कदम करार दिया था और इसके जवाब में स्व-शासित द्वीप के आसपास कई सैन्य अभ्यास किए थे।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां पहुंच गये हैं। वह शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्रों में हिस्सा लेंगे और कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि मैं जी-20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान निकालने में भारत की उपलब्धियों और प्रतिबद्धता को रेखांकित करूंगा। उन्होंने कहा है कि मैं जी-20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक विकास को पुनर्जीवित करने, खाद्य, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अन्य नेताओं के साथ व्यापक चर्चा भी करूंगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में भारत को जी-20 की अध्यक्षता सौंपेंगे, जो हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण पल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत एक दिसंबर से जी-20 की औपचारिक रूप से अध्यक्षता संभालेगा और मैं अगले साल शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए सभी सदस्यों को निजी तौर पर आमंत्रण भेजूंगा। उन्होंने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ या ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ विषय पर आधारित होगी।

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हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और इंडोनेशिया में प्रवासी भारतीय के एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। हालांकि मोदी चीन के राष्ट्रपति शी से मुलाकात करेंगे या नहीं अभी यह स्पष्ट नहीं है। अगर दोनों के बीच मुलाकात होती है तो जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी। हम आपको याद दिला दें कि दोनों नेताओं ने सितंबर में उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी, लेकिन तब दोनों के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी। मोदी 15 नवंबर को एक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय और भारत के मित्रों को भी संबोधित करेंगे तथा उनसे बातचीत करेंगे। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय के लोगों की अच्छी खासी संख्या है। मोदी 16 नवंबर को बाली शिखर सम्मेलन के समाप्त होने के बाद वहां से रवाना होंगे।

उधर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। पुतिन के इस फैसले का पश्चिमी देशों के नेताओं की मंशा पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा, जो यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के खिलाफ रूस की खुलकर निंदा करने को तैयार हैं। बताया जा रहा है कि रूस को शिखर सम्मेलन में ‘‘खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा’’ पर चर्चा के दौरान कड़ी निंदा का सामना करना पड़ सकता है। इस बात के संकेत तब मिल गये थे जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने लंदन से रवाना होने से पहले स्पष्ट कर दिया था, ”जी20 शिखर सम्मेलन इस बार हमेशा की तरह नहीं होगा।’’ 

हम आपको बता दें कि इंडोनेशिया जी-20 का वर्तमान अध्यक्ष है। भारत एक दिसंबर से औपचारिक रूप से जी-20 की अध्यक्षता संभालेगा। जी-20 या 20 देशों का समूह दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर सरकारी मंच है। इसमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं।

बाली में 15 और 16 नवंबर को होने वाला दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए काफी अहम है, क्योंकि इस वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह में इंडोनेशिया जी-20 की अध्यक्षता भारत को सौंपेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि मोदी के इंडोनेशिया के बाली में लगभग 45 घंटे के प्रवास के दौरान लगभग 20 कार्यक्रम हैं। मोदी विश्व के लगभग 10 नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

बहरहाल, इंडोनेशिया ने करीब एक साल पहले जी20 की अध्यक्षता संभालते हुए ‘‘एक साथ उभरें, मजबूती से उभरें’’ का नारा दिया था, जोकि उस समय कोविड-19 वैश्विक महामारी के प्रकोप की मार झेल रही दुनिया के लिए एकदम उपयुक्त था। आज हालांकि रिज़ॉर्ट द्वीप के नुसा दुआ क्षेत्र में जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले बसों और होर्डिंग पर छपा यह नारा थोड़ा कम प्रासंगिक प्रतीत हो रहा है। खासकर तब जब रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद विश्व आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और खाद्य तथा ऊर्जा की कमी का संकट मंडरा रहा है।

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