Prabhasakshi NewsRoom: Azam and Owaisi की नहीं गली दाल, परिणाम देखकर दोनों की आंखें हुईं लाल

ओवैसी हैदराबाद से बाहर निकल कर हर जगह अपने पांव फैलाना चाह रहे हैं लेकिन जनता उन्हें उल्टा लौटा दे रही है। अभी इसी साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बड़े-बड़े दावे कर डाले थे। हिजाब को मुद्दा बना दिया था लेकिन यूपी की जनता ने उन्हें खाली हाथ लौटा दिया।

विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा तथा छह विधानसभा सीटों के उपचुनाव परिणाम तथा दिल्ली नगर निगम चुनाव परिणाम सामने आ चुके हैं। गुजरात में भाजपा जीती तो हिमाचल में कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी। इन चुनावों में बहुत से उम्मीदवार खड़े थे जिनमें से कई की बहुत कम अंतर से हार हुई तो कई की जमानत जब्त हो गयी। लेकिन यदि किसी के दिल के अरमां आंसुओं में बहे हैं तो वह हैं असद्दुदीन ओवैसी और आजम खान। ओवैसी ने गुजरात में पूरा दमखम लगाया और बिलकीस बानो मामले को बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया। रामपुर में आजम खान ने जनता के बीच भावुक होकर और रोकर वोट मांगे लेकिन जनता ने इन दोनों ही हवा-हवाई राजनीतिक सूरमाओं को खारिज कर दिया। ओवैसी ने बिलकीस बानो को आधार बनाकर गुजरात में अपनी सियासत शुरू करने की कोशिश की थी लेकिन हम आपको बता दें कि भाजपा ने गुजरात के दाहोद जिले की लिमखेड़ा विधानसभा सीट पर भी जीत दर्ज की है जहां कभी 2002 के दंगों की पीड़िता बिलकीस बानो रहा करती थीं। ओवैसी हैदराबाद से बाहर निकल कर हर जगह अपने पांव फैलाना चाह रहे हैं लेकिन जनता उन्हें उल्टा लौटा दे रही है। अभी इसी साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बड़े-बड़े दावे कर डाले थे। हिजाब को मुद्दा बना दिया था लेकिन यूपी की जनता ने उन्हें खाली हाथ लौटा दिया। ओवैसी गुजरात में भी बड़ी-बड़ी हुंकार भर रहे थे और उनकी पार्टी ने 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसका खाता ही नहीं खुला। अब ओवैसी कह रहे हैं कि वह हतोत्साहित नहीं हैं।

दूसरी ओर यदि आजम खान के किले या आजम खान के गढ़ माने जाने वाले रामपुर की बात करें तो यह पूरी तरह ढह गया है। आजम खान यहां से दस बार विधायक रहे लेकिन अब उनका राजनीतिक सफर यहां लगभग समाप्त हो गया है। रामपुर में भाजपा उम्मीदवार आकाश सक्सेना ने सिर्फ जीत हासिल नहीं की है बल्कि वह इस सीट पर जीतने वाले पहले हिंदू विधायक भी बन गये हैं। हाल ही में भाजपा ने रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव को भी जीता था और अब रामपुर शहर विधानसभा सीट पर भी उसका कब्जा हो गया है। इस सीट पर भाजपा के आकाश सक्सेना ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के आसिम राजा को 34136 मतों से हराया। भाजपा के लिए यह जीत कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भाजपा आजादी के बाद पहली बार रामपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीती है। इससे पहले करीब 40 साल से यहां सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ही विधायक रहे। उनसे पहले इस क्षेत्र में कांग्रेस का वर्चस्व रहा था।

रामपुर में नया कीर्तिमान रचने के बाद आकाश सक्सेना ने कहा कि रामपुर के मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा को जिताकर यह साबित कर दिया है कि वे भाजपा की कल्याणकारी नीतियों के जरिये अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब रामपुर को एक औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रामपुर की जनता को रोजगार और बेहतर भविष्य चाहिये और इसी को ध्यान में रखते हुए उसने उपचुनाव में मतदान किया है। यहां बाइट लग जायेगी।

वहीं दूसरी, ओर सपा उम्मीदवार आसिम राजा ने परिणामों पर निराशा जाहिर की और पुलिस प्रशासन पर उपचुनाव में सपा के मतदाताओं पर ज्यादती करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘मेरी हार यहां के पुलिस प्रशासन को मुबारक हो।’

हम आपको बता दें कि रामपुर सदर सीट आजम खां को नफरतभरा भाषण देने के मामले में पिछले महीने तीन साल की सजा सुनाए जाने के कारण उनकी सदस्यता निरस्त होने के चलते रिक्त हुई थी, जिस पर उपचुनाव के तहत पांच दिसंबर को मतदान हुआ था। इस उपचुनाव में आजम खां भले ही उम्मीदवार नहीं थे, लेकिन रामपुर का यह उपचुनाव पूरी तरह से आजम खां के इर्द-गिर्द घूमता रहा। सपा उम्मीदवार आसिम राजा के चुनाव प्रचार की कमान पूरी तरह आजम खां के हाथ में रही और चुनावी सभाओं में वह ही मुख्य वक्ता के रूप में शामिल रहे। आजम खां ने आसिम राजा की चुनावी सभाओं में खुद पर हुए कथित जुल्म-ज्यादती का जिक्र करके भावनात्मक अपील के जरिए जनता से वोट मांगे थे।

हम आपको यह भी बता दें कि रामपुर से आजम खान के लिए यह लगातार दूसरा झटका है, इससे पहले इसी साल जून में हुए रामपुर लोकसभा उपचुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी ने सपा उम्मीदवार आसिम राजा को करीब 46 हजार मतों से हराया था।

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