OBC आरक्षण का मुद्दा बना अशोक गहलोत की ‘अग्निपरीक्षा’, अपनों के बीच ऐसे घिरते जा रहे हैं CM

जयपुर:राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कार्यकाल का आखिरी डेढ़ साल मुश्किलों से भरा बनता जा रहा है। कांग्रेस में कलह की सुगबुगाहटें थमने का नाम नहीं ले रही है। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की पैरवी किए जाने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चौधरी ने ओबीसी और पूर्व सैनिकों के आरक्षण की विसंगतियों को मुद्दे को भी फिर से हवा दे दी है। अशोक गहलोत के वफादार रहे हरीश चौधरी ने कहा है कि पूर्व सैनिकों को मिल रहा रिजर्वेशन ओबीसी आरक्षण को कमजोर कर रहा है। इसलिए इसे तत्काल ओबीसी कोटे से अलग किया जाना चाहिए।

बायतु से विधायक हरीश चौधरी सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अब खुलकर सीएम का इस मुद्दे पर विरोध जता रहे हैं। हालांकि इससे पूर्व भी वह इस मुद्दे को उठा चुके है। चौधरी का कहना है कि “ओबीसी आरक्षण विसंगति मामले को कैबिनेट बैठक में रखने के बावजूद एक विचारधारा विशेष के द्वारा इसका विरोध चौंकाने वाला है।” उन्होंने आगे लिखा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मैं स्तब्ध हूं, आखिर क्या चाहते हैं आप? मैं ओबीसी वर्ग को विश्वास दिलाता हूं कि इस मामले को लेकर जो लड़ाई लड़नी पड़ेगी लड़ूंगा।

दिव्या मदरेणा और कृष्णा पूनियां ने खोला मोर्चा
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर हरीश चौधरी के मुखर होने के साथ दूसरे भी कई कांग्रेसी नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चूरू जिले की सादुलपुर विधानसभा सीट से विधायक कृष्णा पूनिया ने ट्वीट करके अपना विरोध जता दिया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि ओबीसी आरक्षण की विसंगति को दूर करके इसका समाधान निकालें। ओबीसी आरक्षण मुद्दा समूचे किसान वर्ग को पूरी तरह प्रभावित करता है, मुझे विश्वास है कि आप इसका समाधान जरूर करेंगे।

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इधर दिव्या मदरेणा ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा कि ओबीसी युवा समझ नहीं पा रहे है कि सरकार के समक्ष ऐसी क्या मजबूरी रही कि दिनांक 09.11.2022 की कैबिनेट बैठक में उक्त मामले को मंजूरी नहीं मिल सकी, जबकि मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ दोनों खुद इसी ओबीसी वर्ग से आते हैं, सरकार तुरंत प्रभाव से परिपत्र दिनांक 17 अप्रैल, 2018 को वापस ले,इतना ही नहीं इस दौरान ब्यूरोक्रेसी पर भी हमला बोला। दिव्या और पूनियां के ट्वीट को भी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

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