Karwa Chauth 2022: ज्योतिष में इसलिए खास है रोहिणी और कृतिका नक्षत्र, जानें करवा चौथ के पूजा का मुहूर्त

रिपोर्ट- कुंदन कुमार

गया. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. इस दिन का इंतजार सुहागिन महिलाएं को रहता है. वो इस दिन पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती है. पर इस बार नवविवाहिता के व्रत और अन्य महिलाओं के उद्यापन को लेकर काफी असमंज है. पर आपकी सारी आशंका को यह रिपोर्ट दूर कर देगा.

निर्जला उपवास
करवा चौथ के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और रात को चांद देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं. हालांकि इस साल करवा चौथ को लेकर एक अफवाह बड़ी तेजी से लोगों के बीच फैल रही है. कुछ ज्योतिषविदों का दावा है कि इस साल करवा चौथ पर शुक्र ग्रह अस्त रहेगा, इसलिए नव-विवाहित महिलाएं अपने पहले करवा चौथ पर व्रत नहीं रख सकेंगी.

गया क्षेत्र के पंडित राजा आचार्या ने बताया कि इस वर्ष बहुत से शास्त्रीय नियमों का हवाला देकर, तारा डूबने के कारण करवा चौथ पर उद्यापन करने के लिए मना करके भ्रमित किया जा रहा है. जनसाधारण को असमंजस में डाल दिया है. यह तर्कसम्मत नहीं है. इसके विपरीत इस बार करवा चौथ पर विशिष्ट संयोग बन रहे हैं, जिन्हें कई विद्वान बिना देखे ही शुक्रास्त के चक्कर में नजर अंदाज किए जा रहे हैं. इस दिन रोहिणी तथा कृतिका नक्षत्र के अलावा सिद्धि योग भी बन रहा है. रोहिणी नक्षत्र ,चंद्रमा का सबसे शुभ नक्षत्र माना गया है. शुक्र या गुरु अस्त होने पर ज्योतिषीय दृष्टि से विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं न कि सभी त्योहार. करवा चौथ तो जीवन साथी की दीर्घायु, स्वस्थ जीवन, व्रत रखने, उपहार देने, उद्यापन करने जैसी स्वस्थ परंपराएं निभाने के लिए है जिसमें तारा डूबने के कारण इस पर कोई रोक लगाना तर्कसम्मत नहीं है.

यदि तारा डूबने के दौरान, नवरात्र, दशहरा, भाई दूज, यहां तक कि दिवाली मनाई जा सकती है तो करवा चौथ का व्रत रखने या उसके उद्यापन में क्या दोष है? देश, काल, पात्र एवं परिस्थितिनुसार हमें आधुनिक समय में शास्त्रों की बहुत सी प्रचलित धारणाओं को बदलने की और उन नियमों के मर्म, भावना तथा आस्था को समझने की आवश्यकता है. अतः नवविवाहिता, जिनके विवाह के बाद यह पहला करवा चौथ है वे भी निसंदेह यह व्रत रख सकती हैं और उद्यापन भी कर सकती हैं. इसलिए 13 अक्तूबर गुरुवार को निसंकोच करवा चौथ मनाएं उद्यापन करें कहीं दोष नहीं लगेगा.

करवा चौथ चतुर्थी तिथि
चतुर्थी तिथि आरंभ-13 अक्तूबर 2022 को सुबह 01 बजकर 59 मिनट पर, चतुर्थी तिथि का समापन 14 अक्तूबर 2022 को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर.
चंद्रोदय यानी चंद्रमा निकलने समय रात 8 बजकर 10 मिनट पर है. महिलाओं को इस समय तक निर्जला व्रत रहना है. करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 01 मिनट से 07 बजकर 15 मिनट तक है.

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
13 अक्तूबर को शाम 06 बजकर 01 मिनट ले लेकर शाम 07 बजकर 15 मिनट तक
अमृतकाल मुहूर्त- शाम 04 बजकर 08 मिनट से शाम 05 बजकर 50 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक.

करवा चौथ पर चंद्रोदय
13 अक्तूबर को रात 08 बजकर 19 मिनट पर
परंतु कई जगह चंद्र कुछ देर में भी दिख सकता है.

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