Jabalpur News: साहब कुत्ते ने बकरी के बच्चे को मार डाला, FIR दर्ज करो और आरोपी को फांसी दो Video Viral

पुलिस में अब ऐसी शिकायतों का बोझ

पुलिस में अब ऐसी शिकायतों का बोझ

इंसानों की भागमभाग दुनिया में कई बार ऐसे मामले सामने आते है, जो सरकारी महकमों को भी सोचने के लिए मजबूर कर देते है कि उनकी जिम्मेदारी क्या-क्या है? आम लोगों की शिकायतों के बीच जानवरों से जुड़े मारपीट के मामलों से पुलिस को गुजरना पड़ रहा है। ऐसा ही मामला मप्र के जबलपुर ग्रामीण इलाके चरगंवा में सामने आया है। जहां बकरी के बच्चे ‘मेमने’ को पड़ोसी के कुत्ते ने काट लिया फिर थोड़ी देर बाद उस मेमने की मौत हो गई ।

मेमने की लाश लेकर थाने पहुंची मालकिन

मेमने की लाश लेकर थाने पहुंची मालकिन

शिकायत तक तो यह मामला ठीक था। लेकिन हद तो तब हो गई जब भड़पुरा गांव में रहने वाली बबीता बाई रजक अपने पति के साथ मृत बकरी के बच्चे की लाश लेकर चरगंवा थाने पहुंच गई। जोर-जोर से रोने लगी और मेमने की मौत को लेकर पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग करने लगी। उसका आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले टक्कल बर्मन के पालतू कुत्ते ने बकरी के बच्चे पर हमला किया। मेमने को कुत्ते ने बुरी तरह काटा, जिसके कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई है। रोती-बिलखती बबीता का कहना था कि उसके घर पल रहा बकरी का बच्चा परिवार के सदस्य की तरह था।

जांच में जुटी पुलिस, पीएम के लिए भिजवाया शव

जांच में जुटी पुलिस, पीएम के लिए भिजवाया शव

शिकायतकर्ता महिला की व्यथा सुनकर पुलिस को भी मामले की जांच शुरू करना पड़ा। मेमने के शव को पोस्टमार्टम के लिए वेटरनरी हॉस्पिटल भिजवाया गया। साथ ही मालकिन और आरोपी कुत्ते के मालिक के भी बयान दर्ज किए जा रहे है। घटना स्थल का मुआयना करने पहुंची पुलिस टीम ने घटना के संबंध में कई लोगों से पूछताछ भी की। लेकिन अभी तक पीड़ित के अलावा ऐसा कोई चश्मदीद नहीं मिला जो यह बता सकें कि बकरी के बच्चे को टक्कल बर्मन के कुत्ते ने ही काटा।

फांसी की सजा की मांग, पुलिस रह गई सन्न

फांसी की सजा की मांग, पुलिस रह गई सन्न

पालतू कुत्ते और बकरी के बच्चे के बीच की इस कहानी में पुलिस के उस वक्त कान खड़े हो गए, बकरी के बच्चे की मालकिन बोली कि FIR के अलावा आरोपी को फांसी की सजा दिलाई जाए। पुलिस थाने में घंटों इस मामले को लेकर गहमा-गहमी का माहौल बना रहा। कुत्ता मालिक के समर्थक भी पहुंच गए और महिला के आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे। काफी देर बाद टीआई विनोद पाठक के उचित कार्रवाई के आश्वासन पर महिला मानी फिर वापस अपने घर लौटी।

ऐसी जिम्मेदारी किस काम की ?

ऐसी जिम्मेदारी किस काम की ?

आम आदमी नींद से लेकर जागने तक के हर सुरक्षा मापदंडों को निभाने का बोझ पुलिस के कंधो पर रहता है। सार्वजनिक व्यवस्था हो, अपराध की रोकथाम या फिर किसी वीआईपी के मूवमेंट में उनकी सुरक्षा पर पहरा, चौबीसों घंटे ड्यूटी निभाना होता है। लॉ इन ऑर्डर का ख्याल रखने की भी प्राथमिकता होती है। ऐसी स्थितियों के बीच पालतू जानवरों से जुड़े झगड़े-फसाद पुलिस की टेंशन और बढ़ा रहे है। इस बीच पुलिस जानवरों के मामले निपटाए कि इंसानों के.. ।

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