Heart attack: हार्ट अटैक आने से 10 साल पहले शुरू हो जाते हैं एंजाइना पिक्टोरस के लक्षण, ऐसे पहचान कर बीमारी से बचें

हाइलाइट्स

हार्ट अटैक वाले चेस्ट पेन में अक्सर छाती के एकदम बीच में दर्द होता है
करीब 70 करोड़ लोग बीपी का इलाज भी नहीं कराते हैं.

Heart attack signal before 10 years: डब्ल्यूएचओ के मुताबिक विश्व में करीब 1.28 अरब लोगों को हाई बीपी या हाइपरटेंशन की बीमारी है. हार्ट अटैक हाइपरटेंशन की सबसे बड़ी वजह है. हार्ट अटैक अचानक आता है और इसमें अधिकांश मरीजों की मौत तुरंत हो जाती है. दुर्भाग्य की बात यह है कि हार्ट अटैक के लक्षणों का पता पहले से चलता ही नहीं. यही कारण कि हार्ट अटैक होने पर अधिकांश लोगों को बचाने में मुश्किल होती है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक करीब 70 करोड़ लोग बीपी का इलाज भी नहीं कराते हैं. क्योंकि उन्हें पता ही नहीं रहता कि उन्हें हाई बीपी है. अब एक नई रिसर्च में दावा किया जा रहा है कि हार्ट अटैक के लक्षणों को 10 साल पहले ही पता लगाया जा सकता है. दरअसल, हार्ट अटैक आने से 10 साल पहले ही शरीर में एंजाइना पिक्टोरस (angina pectoris) की स्थिति आती है.

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एंजाइना पिक्टोरिस में क्या होता है
मायो क्लिनिक के मुताबिक एंजाइना पेक्टोरिस कोरोनरी आर्टरी डिजीज है. एंजाइना पिक्टोरस छाती में दर्द का एक प्रकार है जिसमें हार्ट में ब्लड फ्लो बहुत कम हो जाता है. एंजाइना पेन में अक्सर छाती में स्क्वीजिंग, दबाव, भारपीपन, टाइटनेस और दर्द होता है. ऐसा लगता है जैसे छाती पर बहुत भारी वजन रखा हुआ है. मुश्किल यह है कि इस तरह की परेशानी इनडाइजेशन सहित कुछ और दर्द में होती है. इसलिए खुद इसकी पहचान करना मुश्किल है कि यह एंजाइना है या अन्य कोई परेशानी. इसलिए ऐसी स्थिति में डॉक्टर के पास जाना बेहतर रहता है.

अध्ययन में क्या साबित हुआ

टीओआई की खबर के मुताबिक एचए जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पर अध्ययन के लिए 2002 से 2018 के बीच हुई लोगों के मौत का आंकड़ा जुटाया गया. इनमें करीब 5 लाख ऐसे लोगों की मौत हुई थी जिन्हें पहले किसी तरह के हार्ट से संबंधित बीमारियां नहीं थी.अध्ययन के निष्कर्षों में पाया गया कि कुछ लोगों को एक साल पहले तक छाती में दर्द की कोई शिकायत नहीं थी लेकिन उनकी मौत हार्ट अटैक से हो गई. यानी करीब 15 प्रतिशत ऐसे लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई जिन्हें तत्काल छाती में दर्द नहीं था. लेकिन जिन लोगों ने किसी न किसी तरह छाती में दर्द की शिकायत को लेकर अस्पतालों का दौरा किया उनमें अगले 10 साल तक हार्ट अटैक का जोखिम बना रहा. हालांकि अध्ययन में यह भी कहा गया कि जिन लोगों ने छाती में दर्द की शिकायत को लेकर डॉक्टर से सलाह ली और फैट या लिपिड कम करने वाली दवाई ली उनमें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज होने का खतरा बहुत कम हो गया. यानी समय पर अगर हार्ट डिजीज की दवाई शुरू कर दी जाए तो हार्ट अटैक के खतरे को बहुत कम किया जा सकता है.

डाइजेशन वाले चेस्ट पेन और हार्ट अटैक वाले चेस्ट पेन में अंतर
चेस्ट पेन डाइजेशन प्रोब्लम की वजह से भी हो सकता है. डाइजेशन के कारण छाती में जलन होती है जिसे हार्टबर्न कहते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक हार्ट अटैक वाले चेस्ट पेन में अक्सर छाती के एकदम बीच में दर्द होता है या असहजता या बेचैनी महसूस होती है और यह दर्द कुछ ही मिनट में खत्म भी हो जाता है. इसके बाद यह आ भी सकता है और नहीं भी आ सकता है. इस दर्द में उलझन सा महसूस होता है. ऐसा लगता है जैसे छाती को कोई दबा रहा है या निचोड़ रहा है. एक तरह से छाती में भारीपन महसूस होता है. इससे जबड़ा, गर्दन, बैक और कंधे में भी दर्द हो सकता है. इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. वहीं डाइजेशन से संबंधित चेस्ट पेन तुरंत नहीं जाता और इसमें एसिडिटी भी हो सकती है.

समय पर लक्षणों को पहचानें
एचए जर्नल के मुताबिक अगर समय पर छाती से संबंधित असहजता का इलाज कराया जाए तो हार्ट अटैक के जोखिम को कम किया जा सकता है. इसके लिए छाती में किसी तरह की असहजता महसूस हो तो डॉक्टर से दिखाना चाहिए. अगर छाती के उपरी हिस्से में दर्द हो, सांस लेने में तकलीफ हो, बेचैनी हो, कोल्ड स्वेट, चक्कर आना जैसे लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. वहीं, चिंता, खांसी या घरघराहट भी हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं.

Tags: Health, Health tips, Heart attack, Lifestyle

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