Gorakhpur: गोरखपुर में गीता जयंती पर खास उत्साह, सीएम योगी आदित्यनाथ होंगे शामिल

गोरखपुर. धार्मिक पुस्तकों की छपाई के सबसे बड़े केंद्र ‘गीता प्रेस’ में गीता जयंती को लेकर खास आयोजन होता है. इस वर्ष 4 दिसंबर को यह मनाया जा रहा है. इसमें बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे. गोरखपुर हिंदी कि अगहन माह को मार्गशीर्ष में जाता है. जिसके शुक्ल पक्ष एकादशी को श्रीमद्भागवत गीता की जयंती के रूप में मनाया जाता है. गीता इकलौता ऐसा धर्म ग्रंथ है, जिस की जयंती मनाई जाती है.

महाभारत के युद्ध के समय भगवान कृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए इसके महत्व का वर्णन किया था. इसमें कुछ 700 श्लोक और 18 अध्याय हैं. इसे नीति और धर्म शास्त्र का श्रेष्ठतम ग्रंथ माना जाता है. हिंदू धर्म और सभी धर्मों में इसकी स्वीकार्यता है और महत्ता इसकी इतनी कि आज के दौर में भी अदालत के अंदर गीता पर ही हाथ रख कर लोग सच बोलने की शपथ लेते हैं.

गीता जयंती को लेकर उत्साह
जब-जब मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष एकादशी की तिथि आती है. गोरखपुर में गीता जयंती को लेकर खासा उत्साह देखा जाता है. वजह यह भी है कि इसी शहर से गीता प्रेस जैसे नाम की संस्था धर्म ग्रंथों के छपाई का सबसे बड़ा केंद्र है. जहां श्रीमद्भगवद्गीता अब तक लाखों प्रतियों में छप कर लोगों के घरों तक पहुंच कर अपना संदेश, महत्व और अपने गुणों से लोगों को फायदा पहुंचा रही है. वहीं, गीता प्रेस में इसकी जयंती सैकड़ों वर्षों से होती चली आ रही है. इस वर्ष यह जयंती बेहद खास होने वाली है जो 4 दिसंबर रविवार को पड़ रही है.

इसके महत्व से लोग परिचित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसमें शिरकत करेंगे. गीता प्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल कहते हैं कि भगवत गीता एक ऐसा धर्म ग्रंथ है. जिसे भगवान कृष्ण ने अपने मुख से अर्जुन को सुनाया है. उन्होंने कहा कि इसके महत्व से लोग परिचित हैं. फिर भी आज के डिजिटल युग में इस पर तरह-तरह के व्याख्यान दिए जा रहे हैं.

ऊर्जा और आशा का संचार
गीता के महत्व योगिता को सर्व समाज तक पहुंचाने के लिए भव्य आरती जयंती का आयोजन करेगा. पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर द्वारिका नाथ कहते हैं कि भगवत गीता भारतीय मनीषा का एक अद्भुत और मूल्यवान ग्रंथ है. भगवत गीता को पढ़ने से जो हताश और निराश मानव है. उसके हृदय में ऊर्जा और आशा का संचार होता है. वह इसलिए कि जब इसके सुनने से अर्जुन का भी साथ दूर हो सकता है. तो हम मनुष्यों का क्यों नहीं होगा. यह सर्व शास्त्रमयी कही गई है और अनेक लोगों ने इस पर टीका भी लिखा है. जो सबसे प्राचीन टीका लिखी गई है.

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FIRST PUBLISHED : December 04, 2022, 17:07 IST

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