Amjad Khan Story: शोले से पहले तैयार हो रही थी अमजद खान की यह फिल्म, रमेश सिप्पी ने मिन्नतें करके रुकवाई

Amjad Khan Story: आम तौर पर माना जाता है कि गब्बर सिंह बने अमजद खान सलीम-जावेद की खोज थे, जिन्होंने उन्हें कॉलेज के एक ड्रामे में देखा और शोले के लिए रमेश सिप्पी के आगे नाम बढ़ाया. लेकिन शोले से भी पहले अमजद खान को निर्देशक रामानंद सागर ने देखा था और शोले की रिलीज से पहले उन्हें अपनी फिल्म के लिए फाइनल किया था. फिल्म थी, चरस. जिसमें धर्मेंद-हेमा मालिनी और अजीत थे. चरस के निर्माण के दौरान रामानंद सागर ने एक नाटक प्रतियोगिता में अजमद खान को देखा था. इस एक्टर में उन्हें एक अच्छा विलेन नजर आया और उन्होंने अमजद खान को चरस के मुख्य विलेन अजीत के गैंग के एक सदस्य के रूप में साइन कर लिया. जबकि फिल्म 50 फीसदी शूट हो चुकी थी. तब अमजद खान का रोल फिल्म में बहुत छोटा था.

शोले की शूटिंग के बीच में…
इस बीच शोले की शूटिंग जोर-शोर से चल रही थी. फिल्म के फ्लोर पर जाने से पहले ही जमकर प्रचार हो चुका था. जब निर्देशक रमेश सिप्पी को चरस में अमजद खान की मौजूदगी का पता चला तो उन्होंने तत्काल रामानंद सागर से मिलकर कर अनुरोध किया कि वह अपनी फिल्म को शोले से पहले रिलीज न करें. उन्होंने बताया कि वह शोले में अमजद को मुख्य विलेन के रूप में लॉन्च रहे हैं और अगर वह चरस में छोटे-से रोल में पहले दिखे, शोले पर असर पड़ सकता है. रामानंद सागर मान गए. इस बीच जब शोले रिलीज हुई तो हफ्ता भर इसका रेस्पॉन्स खराब रहा. ऐसा लगा कि अमजद खान को कोई नहीं पहचानेगा. मगर देखते ही देखते फिल्म चल निकली.

छोटे से बड़ा हुआ रोल
1975 में शोले की रिलीज के दो हफ्ते बाद गब्बर चारों तरफ छा गया और जब वितरकों को चरस में अमजद खान की मौजूदगी का पता चला तो उन्होंने रामानंद सागर से कहा कि उनका रोल बढ़ाया जाए. सागर ने भी अमजद खान की लोकप्रियता का ध्यान रखते हुए नए सिरे से उनका किरदार लिखवाया और उन्हें अजीत के गैंग के छोटे मेंबर से अलग विदेशी जमीन पर एक अहम नेगेटिव किरदार दिया. बाद में अमजद खान की बेटी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता ने चरस को शोले की शूटिंग के दौरान साइन किया था. खैर, जो भी हो. अमजद खान चल निकले. चरस शोले की कामयाबी के बाद 1976 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर हिट रही. अमजद खान के पिता जयंत किसी दौर में रामानंद सागर के साथ काम कर चुके थे. अमजद खान रामानंद सागर का इतना सम्मान करते थे कि उन्होंने उनसे कभी फीस की बात नहीं की. चरस के बाद उन्होंने कई मौकों पर सागर आर्ट्स के साथ काम किया और जो भी फीस दी गई, उसे रख लिया.

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