80 साल से बन रहे नवलगढ़ के प्रसिद्ध सिकाई वाले राजभोग, जिसने एक बार खा लिया, वो बार-बार आएगा!

इम्तियाज अली/ झुंझुनूं. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बा सिकाई के राजभोग के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां करीब 80 साल पहले सिकाई के राजभोग बनाने की शुरुआत की गई थी. देश में पहली बार राजभोग की सिकाई करने की शुरुआत नवलगढ़ से हुई थी. इसकी शुरुआत प्रख्यात भगवानजी हलवाई ने की थी. आज उनकी चौथी पीढ़ी इस काम को आगे बढ़ा रही है. एक दुकान की जगह चार दुकानें हो गई. इन्हें देखकर दूसरे लोग भी सिकाई के राजभोग बनाने लग गए. लेकिन जो स्वाद इसके जनक भगवान जी हलवाई के हाथों में था, उसका हर कोई मुरीद होता था. उनके बनाए यह राजभोग इतने प्रसिद्ध हुए कि जिस एरिया में उनकी दुकान है, उस एरिया का नाम ही भगवानजी हलवाई वाली गली हो गया.

आज भले ही असंख्य दुकानों पर सिकाई का राजभोग तैयार किया जाने लगा, लेकिन लोग अभी भी इसे भगवानजी हलवाई वाला राजभोग ही कहते हैं. यानी सिकाई वाले राजभोग का दूसरा नाम ही भगवानजी हलवाई वाला राजभोग है.

80 साल पहले मिंतर चौक के पास गली में हुई थी शुरुआत
नवलगढ़ के मिंतर चौक में एक छोटी सी गली में छोटी सी दुकान में करीब 80 वर्ष पहले भगवानजी सैनी ने यह कारोबार शुरू किया था. उनकी दुकान इतनी प्रसिद्ध हुई कि उस गली का ही नाम भगवानजी की गली पड़ गया. आज उनकी चौथी पीढ़ी यह काम संभाल रही है. एक दुकान से आधा दर्जन दुकानें कर ली. कारोबार भी हजारों से लाखों में पहुंच गया. प्रवासियों की पहली पसंद है. ऑर्डर पर कुरियर सुविधा भी उपलब्ध है. इसके जरिए भगवानजी का शिकाई वाला राजभोग देश के कोने-कोने में पहुंच रहा है. यानी भगवानजी के राजभोग की मिठास का हर कोई दीवाना है, क्योंकि यह शुद्ध देशी गाय के दूध से बनाया जाता है. किसी तरह की कोई मिलावट नहीं की जाती.

एक रुपए के 8 आते थे, अब एक के लगते हैं 18 रुपए
नवलगढ़ के भगवानजी हलवाई के राजभोग की मिठास का हर कोई कायल है. देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इनके सिकाई के राजभोग प्रसिद्ध है. भगवानजी के बेटे गिरधारी लाल सैनी ने बताया कि उनके पिता भगवानजी ने करीब 80 वर्ष पूर्व सिकाई के राजभोग बनाने शुरू किए थे. उनके इस कार्य को अब चौथी पीढ़ी संभाल रही है. वे कहते हैं कि जब पहली बार सिकाई के राजभोग बनाने शुरू किए थे, तब एक राजभोग की कीमत दो आना थी. यानी उस जमाने में एक रुपए में 8 राजभोग बेचते थे. आज एक राजभोग की कीमत 18 रुपए है. 73 वर्षीय गिरधारी कहते हैं कि वे 60 सालों से पिता का कारोबार संभाल रहे हैं. वे भी एक रुपए के चार राजभोग बेच चुके हैं. आज भी वही क्वालिटी बनाए रखने के लिए पूरी मेहनत करते हैं.

एक लीटर दूध में 6 पीस होते हैं तैयार
गिरधारीलाल सैनी बताते हैं कि उनके यहां शुरुआत से ही देशी गाय के दूध से राजभोग तैयार किए जाते हैं. इसके लिए गांवों से दूध लेकर आने वाले दूधियों से कॉन्टैक्ट कर रखा है. उन्हें देशी गाय का दूध ही लाने की हिदायत दे रखी है. कभी कभार मिलावटी दूध लाने पर उसे गर्म करते ही पता चल जाता है. इसलिए दूधिये बिना मिलावट का ही दूध लाते हैं. एक लीटर दूध से करीब 6 पीस तैयार हो जाते हैं. इसके लिए दूध को गर्म कर छन्ना तैयार किया जाता है और फिर छन्ने से राजभोग बनाते हैं. राजभोग की गर्म चीनी में सिकाई की जाती है. कोई कलर नहीं दिया जाता. इसलिए इसका स्वाद सबसे अलग है.

Tags: Jhunjhunu news, Rajasthan news

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