15 दिसंबर को तकिया मेला का होगा शुभारंभ: डीएम ने मेला की तैयारियों का लिया जायजा, मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने का दिया निर्देश

उन्नाव15 मिनट पहले

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उन्नाव के पाटन में हर साल हिंदू मुस्लिम एकता व साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक तकिया मेला इस बार भी पूरी भव्यता के साथ लगेगा। डीएम ने मेला समिति और अफसरों के साथ बैठक कर इसको लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मेला का शुभारंभ 15 दिसंबर को मजार पर चादरपोशी और सहस्त्रत्त्लिंगेश्वर महादेव मंदिर पर पूजन-अर्चन के बाद किया जाएगा। तकिया में 5 जनवरी तक मेला रहेगा।

मेला समिति की बैठक में डीएम अपूर्वा दुबे ने मेला के इतिहास के बारे में जानकारी ली। सदस्यों द्वारा रखे गए प्रस्तावों व सुझावों के अनुसार मेला को पूरी गरिमा व भव्यता के साथ सम्पन्न कराने के निर्देश मेला अधिकारी व एसडीएम बीघापुर को दिए। डीएम ने अधिशासी अभियन्ता विद्युत को निर्देश दिए कि मेला स्थल पर कैम्प लगाकर स्थापित दुकानों को अस्थाई विद्युत संयोजन आवंटित कराएं। ताकि किसी भी दुकानदार को विद्युत की समस्या न रहे। मेला अधिकारी को निर्देश दिए कि विभिन्न विभागीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर ले और मेले के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कराए।

डीएम ने अधिकारियों के साथ की बैठक।

डीएम ने अधिकारियों के साथ की बैठक।

साफ-सफाई का दिया निर्देश
इसके साथ ही सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को अपर पुलिस अधीक्षक, साफ-सफाई को डीपीआरओ, पेयजल आपूर्ति को एक्सईन जल निगम, वाहन व्यवस्था को एआरएम परिवहन, बैरिकेडिंग व्यवस्था को पीडब्लूडी एक्सईन को निर्देश दिए। मेले विभागीय स्टॉल लगाकर केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाएं बताने को भी प्रेरित किया।

मोह दशाह बाबा अंतिम समय में तकिया में रहे
मोह दशाह बाबा के जन्म स्थान और परिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में प्रामाणिक साहित्य उपलब्ध नहीं है। जिले के मशहूर कवि काका बैसवारी उन्हे मक्का मदीना का मानते थे तो कुछ साहित्यकार बसरा बगदाद का मानते हैं। पाटन स्थित तकिया मदरसा के मौलवी इब्राहिम रजा के मुताबिक उनका जन्म ईराक के हेरात में हुआ था। जन्म के बारे में प्रमाणिक अभिलेख भले ही उपलब्ध न हो, लेकिन उनका अंतिम समय बीघापुर तहसील के कस्बे तकिया में ही बीता।

तकिया के गद्दीधरों की परंपरा के वर्तमान अली हुसैन शाह 18वें गद्दीधर हैं। गद्दीधरों के अनुसार मोह मदशाह बाबा ने सरगुजा, बंजरिया (बहराइच) कटरा चरखारी आदि स्थानों पर रुककर लोगों को उपदेश दिए। कालांतर में सहस्त्र लिंगेश्वर मंदिर के सामने कुटी बनाकर रहने लगे और उनका इंतकाल भी यहीं हुआ। नवाब असफाउददौला ने भी मोह मदशाह बाबा से भेंट की थी। इसका उल्लेख अवध गजेटियर में भी है।

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