गुलशन कश्यप/जमुई. एक ट्रेन, उसके 18 डिब्बे और उसमें सवार 1500 रेल यात्री. इन सभी की जिंदगी है उस वक्त अटक गई जब यह ट्रेन आग की लपटों के बीच से निकल गई. बाहर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा थी और लोग ट्रेन रोकने के लिए चिल्ला रहे थे. ड्राइवर के पास यह अवसर भी नहीं था कि वह ट्रेन को ब्रेक लगा सके और ट्रेन दन-दनाती हुई आग की तेज लपटों के बीच गुजर गई. ट्रेन में बैठे रेल यात्री बस भगवान को याद कर रहे थे. आग की लपटें देख रहे थे. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है. इसी बीच ट्रेन रुकी और अफरा-तफरी मच गई और लोग ट्रेन से बाहर निकाल कर भागने लगे. यह मंजर किउल-जसीडीह रेलखंड पर सिमुलतला रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूर देखने को मिला. जब पूरी-जयनगर साप्ताहिक एक्सप्रेस आग की तेज लपटों के बीच से गुजर गई. रेल यात्रियों ने इस पूरी घटना की आंखों देखी बताई.
जमीन गिरा 33 हजार वोल्ट करंट का तार
गौरतलब है कि किउल-जसीडीह रेलखंड के सिमुलतला रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूर ओवरहेड तार अचानक ही जलने लगा और जलकर जमीन पर गिर गया. इस दौरान उसमें से आग की तेज लपेट निकलती रही और आग इतनी तेज थी कि इसे कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता था. इसी बीच पूरी-जयनगर साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन सिमुलतला रेलवे स्टेशन से खुली और वह आग की उन तेज लपटों के बीच से होकर गुजर गई. गनीमत यह रही की ट्रेन के किसी हिस्से में आग नहीं लगी वरना बड़ा रेल हादसा सामने आ सकता था. इतना ही नहीं ओवरहेड तार में 33 हजार वोल्ट का करंट प्रवाहित था और वह वही लटक रहा था. जिसके ठीक नीचे से ट्रेन गुजरी अगर वह तार किसी भी तरीके से ट्रेन के संपर्क में आ जाता तो हादसे का मंजर क्या होता इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.
ट्रेन रोकने के लिए चिल्लाते रहे ग्रामीण
ट्रेन में सवार रेल यात्रियों ने बताया कि ट्रेन सिमुलतला स्टेशन से खुली और वह अपनी पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी. तभी थोड़ी दूर जाने के बाद हमने देखा कि रेलवे लाइन के दोनों तरफ सैकड़ो ग्रामीण खड़े हैं. वह ट्रेन रोक दो…ट्रेन रोक दो… चिल्ला रहे हैं. हम लोगों को यह समझ में ही नहीं आया कि ग्रामीण ऐसा क्यों कर रहे हैं. तभी थोड़ी देर बाद हमने देखा कि काफी तेज धुआं निकल रहा है. आग की लपटे जल रही हैं. हम इससे पहले की कुछ समझ पाते ट्रेन उसे आग को चीरते हुए आगे बढ़ने लगी. वही, यात्रियों ने बताया कि ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर के द्वारा चाह कर भी इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाया जा सकता था, अगर ऐसा किया जाता तो ट्रेन लेट हो सकती थी. हालांकि, इसके बाद हाई वोल्टेज करंट की संपर्क में आने से ट्रेन का इंजन बंद पड़ गया और ट्रेन आगे जाकर खड़ी हो गई. इसके बाद ट्रेन में सवार सभी रेल यात्री बाहर निकल आए और इधर से उधर भागने लगे. इसके बाद किउल जसीडीह अप लाइन पर रेल परिचालन ठप हो गया और कई ट्रेन विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी हो गई. बहरहाल इस घटना के 7 घंटे बाद इस रेल लाइन पर परिचालन शुरू किया जा सका.
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FIRST PUBLISHED : November 3, 2023, 23:45 IST