भगवान में नहीं रखते थे भरोसा, फिर अनिरुद्धाचार्य महाराज के शरण में पाया ज्ञान

रामकुमार नायक, रायपुरः- कहते हैं कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और इसे किसी भी उम्र में निखारा जा सकता है. छत्तीसगढ़ में भी एक ऐसी कहानी कथावाचक शेषाचार्य महाराज की है, जो महज 17 साल की उम्र में कथावाचक बनकर धर्म का प्रचार कर खूब नाम कमा रहे हैं. आए दिन शेषाचार्य महाराज द्वारा भागवत कथा का आयोजन होता रहता है. आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज इनके गुरु हैं. शेषाचार्य महाराज की उम्र वर्तमान में मात्र 20 वर्ष है. आइए जानते हैं कि शुरुआती दिनों से लेकर अब तक का उनका सफर कैसा रहा.

भगवान पर नहीं था विश्वास
शेषाचार्य महाराज ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि भगवान के ऊपर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करते थे. लेकिन जीवन में ऐसी परिस्थितियां आईं, जहां लगने लगा कि अब श्री कृष्ण जीवन में नहीं हो, तो यह जीवन नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसी कई प्रकार की समस्या आई, जब प्रत्यक्ष रूप से कृष्ण कन्हैया की कृपा का एहसास हुआ. तब जाकर भगवान के प्रति मुझे विश्वास होने लगा. जीवन की सारी माया छोड़ माधव की चरण-शरण में आए हैं. शेषाचार्य महाराज की आध्यात्म जगत की शुरुआत वर्ष 2019 में सबसे पहले छत्तीसगढ़ से वृंदावन का रहा, जहां गुरु परंपरा का अनुसरण करते हुए गुरुकुल में रहकर उन्होंने वेद-वेदांत की पढ़ाई की. शेषाचार्य महाराज पहले विज्ञान की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम स्कूल से कर रहे थे, लेकिन धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए गुरुकुल में जाकर वेद-वेदांत और शास्त्रों की शिक्षा ली. गुरुकृपा से आज सनातन धर्म के प्रति लोगों को जागरूक कर सनातन धर्म में जोड़ रहे हैं.

अनिरुद्धाचार्य महाराज हैं गुरु
शेषाचार्य महाराज ने बताया कि उनके सबसे पहले गुरु माता-पिता हैं, जिनकी वजह से उनका जन्म हुआ और वह उनके माध्यम से बोलना और चलना सीखे. जब वृंदावन गुरुकुल में अध्ययन करने गए, तब उन्हें अनिरुद्धाचार्य जी महाराज गुरु स्वरूप मिले. उनके सानिध्य में रहकर शेषाचार्य महाराज ने वेद-वेदांत और धर्म शास्त्र की पढ़ाई की और आज एक कथावाचक बनकर धर्म का प्रचार चारों ओर कर रहे हैं.

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कथा में भक्तों का जनसैलाब
शेषाचार्य महाराज ने उनके द्वारा सुनाए जाने वाले भागवत कथा को लेकर कहा कि यह तो मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे जैसे अपात्र को सुनने लोग आ रहे हैं. यह मेरी कथा और मेरा प्रभाव नहीं है, बल्कि यह तो भगवान कृष्ण कन्हैया की सुंदर मधुर कथा का प्रभाव है. कृष्ण कन्हैया की कथा इतनी मधुर है कि हाल ही में इसका जीता जागता उदाहरण महासमुंद जिले के जोगीदादर गांव में हजारों की भीड़ में देखने मिली. यहां श्री धाम वृंदावन से 108 महाराज ने आकर अष्टोत्तरशत का आयोजन किया, जहां प्रत्येक दिन पांच हजार से अधिक भक्तों की उपस्थिति रहती थी. कथा में एक से दो हजार की संख्या में भक्तों की आने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन हर पंडाल बड़ा करना पड़ रहा था. भागवत कथा सुनने वाले भक्तों में लगातार इजाफा हो रहा है.

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