चीन की रहस्यमयी बीमारी पर बड़ा खुलासा! निमोनिया नहीं… इस वजह से खतरे में मासूम!

नई दिल्ली:  

China Pneumonia News: चीन में पनपते रहस्यमयी निमोनिया को लेकर बड़ी खबर है. हाल ही में चीन ने दावा किया है कि, बच्चों में माइकोप्लाज्मा के कारण होने वाले निमोनिया के मामलों में गिरवाट दर्ज की गई है. हालांकि साथ ही चेतावनी भी दी है कि, अन्य श्वसन संबंधी बीमारियां व्यापक आबादी को चपेट में ले सकती है. इसे लेकर बीजिंग में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि, फ्लू, एडेनोवायरस और रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस ने माइकोप्लाज्मा को, रोगियों में पाए जाने वाले पैथोजन के तौर पर अब पीछे छोड़ दिया है. लिहाजा अब श्वसन संबंधी समस्याओं को लेकर खतरा मंडराने लगा है…

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निकटवर्ती तियानजिन और वित्तीय केंद्र शंघाई में भी हाल के दिनों में माइकोप्लाज्मा की दर में गिरावट देखी गई है. लेकिन बावजूद इसके, China’s National Health Commission ने पिछले सप्ताह के अंत में चेतावनी देते हुए कहा था कि, कई श्वसन पैथोजन का प्रसार अब और अगले वसंत के बीच बड़े प्रकोप में तबदील हो सकता है. 

ज्ञात रोगाणु हैं प्रकोप की मुख्य वजह

गौरतलब है कि इस महीने चीन के अस्पतालों में किंडरगार्टन और प्राथमिक विद्यालयों के निमोनिया से ग्रसित बच्चों का सैलाब देखने को मिला, जिसके मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खुद इसे लेकर चीन से सवाल-जवाब किए. इस मामले में चीन का कहना है कि, ज्ञात रोगाणु यानि Known Germs ही इस प्रकोप की मुख्य वजह हैं, खासतौपर पर माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma Pneumoniae), जोकि एक जीवाणु संक्रमण है, जो आमतौर पर बड़े बच्चों और वयस्कों में हल्की सर्दी की वजह से पनपता है. मगर छोटे बच्चों में अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है.

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सोशल मीडिया पर बन रहा माहौल

इसी तरह के मामलों में इजाफे के चलते, परेशान माता-पिता अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े, जिससे शीर्ष बाल चिकित्सा केंद्र तनाव में आ गए. यही नहीं, बल्कि चीनी सोशल मीडिया पर अस्पताल में खचाखच भरे हॉलवे और इन्ट्रावीनस इंजेक्शन ले रहे बच्चों की तस्वीरें वायरल होने लगी. 

मांग, अस्थायी तौर पर बंद हो स्कूल…

इस प्रकोप के प्रसार से घबराए लोग सार्वजनिक जगहों में मास्क का इस्तेमाल करने लगे. साथ ही पूर्वी झेजियांग प्रांत के कुछ स्कूलों में कई बच्चों के माइकोप्लाज्मा और अन्य बीमारियों से पीड़ित होने के बाद, स्कूलें बंद कर दी गई. कुछ अभिभावकों की मांग है कि स्कूल को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया जाए. 




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