अनुज गौतम/सागर. टीवी या अखबारों या फिल्मों में आपने जेल में कैदियों की जिंदगी कैसे कटती है, इस बारे में खूब देखा-सुना और पढ़ा होगा. क्या वास्तविक जीवन में भी जेल ऐसे ही होते हैं, यह सवाल आपके मन में भी उठता होगा. जेल के अंदर कैदी कैसे रहते हैं? क्या फिल्मों की तरह यहां भी गुंडागर्दी होती है या फिर पुराने कैदियों की मनमानी चलती है…ऐसे तमाम सवालों के जवाब आपको लोकल18 के इस वीडियो के जरिए मिल जाएंगे.
सागर केंद्रीय जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे ने लोकल18 से बातचीत के दौरान जेल में कैदियों की जिंदगी के बारे में विस्तार से बताया. नरगावे बताते हैं कि जेल की 3 श्रेणियां होती हैं- केंद्रीय जेल, जिला जेल और उप जेल. सभी जगह लगभग एक जैसी ही दिनचर्या होती है, जिसमें सुबह उठने से लेकर चाय-नाश्ता, खाना, मुलाकात करना जेल के अंदर ही घूमना या काम करना शामिल है. जितने दिन भी कैदी यहां रहते हैं उनके लिए सारे दिन एक बराबर होते हैं. तीज-त्योहार या विशेष कार्यक्रमों में ही कुछ बदलाव देखने को मिलता है. इसी तरह वह हफ्ते, महीने साल और कई साल तक सजा काटते रहते हैं.
उजाला होते ही जेल खुल जाती है जेल
दिनेश नरगावे ने बताया कि जेल में जो कैदी होते हैं उनकी दिनचर्या रोजाना एक जैसी होती है. दिन की शुरुआत सूर्य निकलने से शुरू होती है. सबको जेल से निकालकर इकट्ठा किया जाता है. गिनती होती है फिर सभी कैदी राष्ट्रगीत और प्रार्थना करते हैं. इसके बाद दैनिक कार्य करते हैं. सुबह 8 बजे के आसपास चाय-नाश्ता दिया जाता है. फिर मुलाकात का समय और जिन्हें इलाज की जरूरत होती है, उन्हें अस्पताल भेजा जाता है. जो फैक्ट्री और कारखाने में काम करते हैं, उन्हें कारखाने में भेजते हैं.
सुबह 11 बजे के आसपास कैदियों को भोजन मिलता है. एक डेढ़ बजे तक दोबारा बैरक में बंद होते हैं. शाम 4 बजे बैरक खोले जाते हैं. 6:30 बजे तक रात का खाना दे दिया जाता है. शाम 7 बजे कैदियों को वापस बैरकों के भीतर भेज दिया जाता है. नरगावे ने लोकल18 को बताया कि सागर केंद्रीय जेल के अंतर्गत संभाग की तीन जिला जेल और 7 उप जेल हैं. केंद्रीय जेल में लगभग 2000 बंदी हैं, वहीं इससे संबंधित जिलों को मिलाकर साढ़े तीन हजार से अधिक कैदी जेलों में हैं. इनमें करीब 200 महिला बंदी भी शामिल हैं.
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FIRST PUBLISHED : March 12, 2024, 11:56 IST