क्या रूसी खुफिया एजेंसी के सहारे सत्ता में हैं पुतिन: दिल पर मुक्का और चाय में जहर, दुश्मनों को खौफनाक मौत देने वाली FSB की कहानी

57 मिनट पहले

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आज दुनिया के सबसे बड़े देश रूस में राष्ट्रपति चुनाव का आखिरी दिन है। पुतिन का 5वीं बार रूस का राष्ट्रपति बनना तय है। इसकी वजह ये है कि उनके विरोधी या तो मारे जा चुके हैं या उन्हें देश से निकाल दिया गया है।

19 साल से सत्ता में रह चुके पुतिन इतने ताकतवर हैं कि चुनाव में उनके खिलाफ वो 3 उम्मीदवार हैं, जो उन्हीं के समर्थक हैं। रूस की खुफिया एजेंसी FSB पर 10 सालों में पुतिन के 8 विरोधियों को मारने के आरोप हैं। किसी को जहर दिया गया, तो किसी का हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ।

रूसी खुफिया एजेंसी FSB की शुरुआत कब हुई, ये कैसे इतनी ताकतवर हुई और इसके दुश्मनों के खात्मे का अंदाज क्यों चर्चा में रहता है? जानिए इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब…

KGB ने महिला एजेंट्स और हनीट्रैप का भी खूब इस्तेमाल किया। 1960 में ब्रिटेन के एक सांसद एंथनी कोर्टनी की KGB की महिला एजेंट के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें प्रेस के सामने दिखाई गईं। इससे एंथनी का पूरा करियर तबाह हो गया।

चेचन्या में 2006 और 2009 में 2 हत्याएं हुईं। मरने वाली दोनों महिलाएं पत्रकार थीं। एना और नतालिया पुतिन के शासन की आलोचक थीं।

एना को एलिवेटर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली मार दी गई। पांच लोगों को एना का हत्यारा ठहराया गया था।

नतालिया को 2009 में उनके घर के बाहर से उठा लिया गया। उन्हें कई गोलियां मारी गईं और लाश को पास के जंगल में फेंक दिया गया। दोनों हत्याओं के आरोप रूस की FSB पर लगे।

FSB को कहां से मिलती है दुश्मनों को मारने के लिए फंडिंग

रूस अपनी सिक्योरिटी सर्विसेज पर सालाना 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करता है। इसी बजट से रूस की FSB पर खर्च होता है। एक पूर्व FSB अधिकारी के मुताबिक खुफिया एजेंसी के एजेंट्स व्यापारी बन चुके हैं। यानी वो अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल अपनी जेब भरने के लिए करते हैं।

रूस की खुफिया एजेंसियों के लिए ये नई बात नहीं। जब भी उनकी फंडिंग पर संकट आता है तो वो अपना जुगाड़ खुद ढूंढ लेती हैं। इससे जुड़ा एक किस्सा नीचे पढ़िए…

माफ करना नहीं जानते पुतिन
येवगेनी प्रिगोजिन, यूक्रेन जंग में किसी रूसी कमांडर से भी ज्यादा ये नाम सुनाई देता था। वजह थी रूस की प्राइवेट आर्मी वैगनर, जिसकी कमान प्रिगोजिन के हाथों में थी। वो प्रिगोजिन जो अपनी कुकिंग से पुतिन के करीब आए, उनके रसोइए बने और वैगनर आर्मी के चीफ।

जंग ने दोनों के बीच सब कुछ बदल दिया। प्रिगोजिन पुतिन के प्रशासन पर आरोप लगाने लगे कि उनके लड़ाकों को हथियार नहीं दिए जा रहे, उन्हें खर्चे के लिए पैसे नहीं मिल रहे। प्रिगोजिन की नाराजगी बगावत में बदल गई। जून 2023 में वो अपने लड़कों के साथ रूस की सड़कों पर उतर आए और मॉस्को की तरफ बढ़ने लगे। इसे पुतिन के खिलाफ बगावत समझा गया।

बातचीत के बाद प्रिगोजिन ने लड़ाकों को वापस बुला लिया। लगा कि रूस में सब नॉर्मल हो गया। पुतिन ने प्रिगोजिन को माफ कर दिया है। फिर 2 महीनों के अंदर 23 अगस्त 2023 को प्रिगोजिन का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया और वो मारे गए।

क्या सिर्फ KGB की वजह से सत्ता में टिके हैं पुतिन ?

रूसी मामलों के जानकार और JNU में प्रोफेसर डॉक्टर राजन कुमार बताते हैं। रूस कभी लोकतांत्रिक देश होने का दावा नहीं करता है। इसमें कोई शक नहीं है कि रूस जैसे देशों में जहां सत्ता चंद लोगों के हाथों में होती है, वहां सरकारें सीक्रेट पुलिस के जरिए काम करती हैं।

सोवियत यूनियन के वक्त टारगेट करने, मारने या धमकाने में सीक्रेट पुलिस के इस्तेमाल की परंपरा रही है। रूस की खुफिया एजेंसियां सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी सक्रिय हैं। ये सही है कि वहां विरोधियों को खत्म करने में पुतिन को FSB का साथ मिला है। हालांकि ये कहना कि पुतिन FSB (पूर्व में KGB) के जरिए ही पावर में हैं, ये ज्यादती होगी। पुतिन का जो रूल है उसके कई कारण हैं।

  • रूस में मल्टी पार्टी सिस्टम है यानी वहां कई पार्टियां हैं पर सभी विपक्षी पार्टियां काफी कमजोर हैं।
  • रूस में मीडिया फ्रीडम नहीं है, कोई पुतिन के खिलाफ नहीं लिख सकता। पुतिन के लोग हर विभाग में बैठे हैं।
  • पुतिन वहां पश्चिमी देश के खिलाफ माहौल बनाने में कामयाब रहे हैं। लोगों को NATO बड़ा खतरा लगता है। उन्हें लगता है कि रूस को जंग में धकेला गया है। जंग में पुतिन को लोगों का साथ मिला है।

इलस्ट्रेशन- संदीप पाल

ग्राफिक्स- कुणाल शर्मा

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