कानपुर के इस मंदिर में बाल स्वरूप में विराजमान हैं रामलला, रोचक है 170 साल पुराने मंदिर की कहानी

अखंड प्रताप सिंह/कानपुर: 22 जनवरी का दिन बहुत ही खास होने वाला है. यह भाव भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा दिन है. इस इन अयोध्या में भगवान रामलला का भव्‍य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने जा रहा है. कानपुर भी आस्था का एक बड़ा केंद्र है. यहां पर भी भगवान राम का एक विशाल प्राचीन मंदिर मौजूद है, जो कि लगभग 170 साल पुराना है. दावा है कि यह विश्व का ऐसा इकलौता मंदिर है, जहां भगवान राम अपने बाल स्वरूप में विराजमान हैं.

कानपुर के रावतपुर गांव में मौजूद पुराना रामलला मंदिर बेहद प्राचीन और भव्य है. यहां पर रामनवमी के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. मंदिर के पुजारी सुशील मिश्रा ने बताया कि यह मंदिर 1800 ईस्वी में बनाया गया था. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के एक राजा (जिनका विवाह कानपुर में हुआ था) का साम्राज्य हुआ करता था. इसके तहत 56 गांव आते थे.

रानी ने भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाया
पुजारी सुशील मिश्रा ने बताया कि शादी के बाद राजा यहां से चले गए और कई सालों तक यहां वापस नहीं आए. जबकि रानी उनका इंतजार करती रहीं थी. जब 10 साल से ज्यादा का समय हो गया और राजा वापस नहीं आए, तो रानी की कोई संतान नहीं थी. इसके बाद उन्होंने यहां पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाया और भगवान के बाल स्वरूप की मूर्ति को स्थापित किया. फिर उसे ही अपने बालक स्वरूप के रूप में गोद ले लिया और अपनी सारी संपत्ति रामलला ट्रस्ट के नाम कर दी.

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए खास तैयारी
वहीं, 22 जनवरी को आयोजित होने वाले अयोध्या में कार्यक्रम को लेकर कानपुर में इस मंदिर में भी खास तैयारी की जा रही है. कानपुर के प्राचीन मंदिर को 11000 घी के दीपक से सजाया जाएगा. इसके साथ ही अयोध्या में होने वाले कार्यक्रम का प्रसारण भी किया जाएगा, ताकि लोग यहां पर आकर न सिर्फ भगवान की भक्ति कर सकें बल्कि अयोध्या में होने का अनुभव भी हो सके.

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