मोहन प्रकाश/सुपौल.मंदिर की तस्वीर देखकर आप इसे दक्षिण भारत के किसी शहर की नहीं समझ बैठिए. क्योंकि यहसुपौल जिले के गणपतगंज में एनएच 106 किनारे 15 एकड़ में बना वरदराज पेरूमल देवस्थानम विष्णुपद मंदिर है. दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मंदिर इस इलाके केलोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है. यह बिहार में प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से उभरा है. वहीं अपनी कलाकृतियों एवं भव्यता के लिए विष्णु भगवान को समर्पित यह मंदिर पूरे देश में प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि बिहार में स्थित इस मंदिर की तुलना चेन्नई के प्रसिद्ध विष्णु मंदिर से की जाती है.
इस मंदिर में दक्षिण भारतीय वैष्णव पद्धति से पूरे वर्ष तीन उत्सव के रूप में ब्रह्माेत्सव, पवित्रोत्सव व कल्याणोत्सव का आयोजन होता है. इसको लेकर मंदिर निर्माणकर्ता की बहन लीला मल्लिक ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण कोसी क्षेत्र के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. पवन कुमार मल्लिक ने कराया है.
डॉ. पीके मल्लिक ने कराया पूरे मंदिर का निर्माण
उन्हाेंने बताया कि डॉ. पीके मल्लिक की बचपन से ही भगवान के प्रति काफी गहरी आस्था थी. वे जब तीन वर्ष के थे तो उस समय दूसरे बच्चों से पूछा जाता था तो वे कहते थे कि बड़ा होकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस बनूंगा, लेकिन डॉ. पीके मल्लिक कहते थे की वे मंदिर बनाएंगे. वे एक ही बात समझते थे कि भगवान का काम करना है. उनके लिए परिवार सेकेंडरी रहा और हमेशा भगवान व उनका कार्य प्राथमिकता में रहा.
पूरे वर्ष में मंदिर में होता है तीन भव्य उत्सव
उन्होंने बताया कि इस मंदिर की नींव डॉ. पीके मल्लिक ने वर्ष 2004 में रखा था. जिसका उद्घाटन वर्ष 2014 में भव्य अनुष्ठान संतोक्षणम के साथ किया गया. लीला मल्लिक बताती हैं कि इस मंदिर का निर्माण अकेले डॉ. पीके मल्लिक ने किया. इस मंदिर में पहला ब्रह्माेत्सव होता है. सात दिवसीय उत्सव फरवरी में होता है. उसके बाद दूसरा है पवित्रोत्सव. सालभर जो हमलोग गलत काम करते हैं, भगवान की नजर में अपराध करते हैं.
उससे पवित्र होने के लिए अगस्त महीने में रक्षा बंधन के दिन से सात दिनों तक पवित्रोत्सव चलता है. इसके बाद भगवान को पाने के लिए भूदेवी ने जो एक महीने का कठिन व्रत किया था, वही कठिन व्रत कल्याणोत्सव के रूप में 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक चलता है. जिसके अंतिम दिन भूदेवी की शादी भगवान से हो जाएगी.
.
Tags: Bihar News, Local18
FIRST PUBLISHED : December 24, 2023, 12:39 IST