हैकर भी नहीं तोड़ पाएंगे तस्वीरों का तिलिस्म,अब फोटो इंक्रिप्टेड पासवर्ड से लगेगी ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम

कानपुर. जैसे-जैसे लोग डिजिटल युग की ओर बढ़ रहे हैं,वैसे-वैसे ही साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं. कई बार हम साइबर फ्रॉड के शिकार भी बन जाते हैं, लेकिन अब साइबर अपराध पर रोक लगेगी. कानपुर के एक युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसा इमेज इंक्रिप्टेड पासवर्ड तैयार किया है, जिसको हैक करना नामुमकिन के बराबर है. कानपुर के प्रणवीर सिंह इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर तैनात डॉ. वरुण शुक्ला ने बताया कि वह कई सालों से साइबर सुरक्षा को लेकर काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि रोजाना खबरों में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले सामने आते रहते हैं. लोग अपनी आर्थिक और व्यक्तिगत जानकारी ईमेल या ऑन ऑनलाइन माध्यम के माध्यम से सुरक्षित रखते हैं, लेकिन फिर भी वह ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं.जिसे रोकने के लिए उन्होंने एक नया पासवर्ड तैयार करने का निर्णय लिया. इसके बाद उन्होंने मैथमेटिक एल्गोरिदम के जरिए यह फोटो इंक्रिप्टेड पासवर्ड तैयार किया है, जो उनके डाटा और जानकारियों को साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखेगा.

ज्यादातर ऑनलाइन अकाउंट और सोशल मीडिया अकाउंट, बैंकिंग ऑनलाइन अकाउंट पर हम लोगों के टेक्स्ट पासवर्ड होते हैं.जिसे हैक करना आसान होता है. हैकर इन को बेहद आसानी से हैक भी कर लेते हैं. जिस वजह से हमारे साथ फ्रॉड हो जाते हैं, लेकिन पीएसआईटीके एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण शुक्ला ने एक ऐसा मैथमेटिकल एल्गोरिदम के तहत पासवर्ड तैयार किया है. इसमें पासवर्ड की जगह एक फोटो को पासवर्ड के रूप में सेट किया जाता है.यूजर को इस फोटो के बारे में पता रहता है.वहीं जब यूजर अपना अकाउंट एक्सेस करने जाता है. तब वह फोटो विभिन्न टुकड़ों में बंंटकर आप के सामने आ जाती है.अगर तय समय में वह फोटो सही लगा लेता है, तभी वह अकाउंट ओपन होगा.अन्यथा यह बार-बार की प्रक्रिया बढ़ती जाएगी और जैसे-जैसे पासवर्ड गलत पड़ता जाएगा वह तस्वीर 5 टुकड़ों से शुरू होकर 100 टुकड़ों तक टूटती चली जाएगी. इतना ही नहीं वह कुछ अटटेम्पस के बाद यूजर को उसके फोन और मेल के जरिए अकाउंट में अनऑथराइज्ड एक्सेस की जानकारी भी देगा , ताकि फ्रॉड होने से रोका जा सकेगा.

अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई यह खोज
डॉक्टर वरुण शुक्ला द्वारा तैयार किया गया यह सिस्टम स्विट्जरलैंड के जर्नल स्प्रिंजल में प्रकाशित किया गया है. इस तकनीक को यूनिवर्सिटी ऑफ माल्टा और एनआईटी रायपुर के विशेषज्ञों ने भी सराहा है.

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FIRST PUBLISHED : December 08, 2022, 15:46 IST

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