सतना जिले की यह महिला 110 बेटियों की कहलाती है मां, जानिए क्या है वजह?

रिपोर्ट- प्रदीप कश्यप

सतना. सतना जिले की एक ऐसी महिला जो कहलाती हैं, 110 बेटियों की मां. इन्होंने अपने जीवन में वह किया जिसके बारे में जानकर आपको भी एक प्रेरणा मिलेगी. बच्चों की मां के साथ एक अनमोल रिश्ता होता है, जिसे यह बखूबी निभाती हैं. शुरुआती दौर में 6 बच्चियों की शिक्षा दीक्षा का बीड़ा उठाया, वर्तमान में इन्होंने 110 बेटियों की शिक्षा दीक्षा का पूरा कार्यभार संभाल रखा है, इन्हें इन सभी बेटियों ने मां का दर्जा दिया हुआ है और मां कहकर ही इन्हें पुकारती हैं. कौन है यह मां, आईए जानते हैं इनके बारे में…

सतना शहर के कृष्ण नगर क्षेत्र में रहने वाली एक महिला जिनका नाम सोनिया जौली है, जिन्होंने यह साबित कर दिखाया कि बेटियां समाज में उपेक्षा का शिकार नहीं है, बस उन्हें एक सहारे की जरूरत होती है, वह सहारा किसी न किसी को बनना चाहिए.

110 बेटियों के समूह को उपकार सोसाइटी का नाम दिया
सोनिया ने 31 वर्ष की उम्र में गरीब और निर्धन 6 बेटियों की पूरी शिक्षा दीक्षा का खर्च उठाने का जिम्मा उठाया था, देखते ही देखते उनके पास बेटियों की संख्या बढ़ने लगी, वर्ष 2020 में इनके पास करीब 55 बेटियां हो गई, जिनकी पूरी शिक्षा दीक्षा का खर्च सोनिया उठाती हैं, और वर्तमान समय में वर्ष 2022 में सोनिया के पास 110 गरीब और निर्धन परिवार की बच्चियां हैं, जिनकी पूरी शिक्षा दीक्षा का खर्च सोनिया वहन कर रही हैं, सोनिया ने शिक्षक के साथ-साथ मां का फर्ज बखूबी निभाती हैं.

इन्होंने 110 बेटियों के समूह को उपकार सोसाइटी का नाम दिया, और उपकार सोसाइटी से जुड़ी 110 बच्चियों की पढ़ाई लिखाई के पूरा खर्च का बीड़ा उठा रखा है, यह 110 बेटियां सोनिया को मां कहकर पुकारती है.

मां बेटी जैसा रिश्ता कोई और नहीं
सोनिया का कहना है कि बेटियां समाज का आईना होती है, बेटियों को अगर शिक्षित किया जाए तो बेटियां समाज में एक मिसाल कायम करती हैं, सोनिया जौली एक ग्रहणी महिला है, वह 21 वर्ष की उम्र से समाज सेवा करती चली आ रही हैं, और समाज सेवा के कई कार्य भी किए, उनका कहना है कि रिश्ते तो और भी कई हैं, रिश्तों की कमी नहीं, लेकिन मां बेटी जैसा कोई और नहीं, अपने बच्चे तो हमें मां बोलते हैं, लेकिन जब दूसरे बच्चे हमे मां बोलते हो तो आप समझ सकते हैं कि हमारे अंदर कितनी अच्छी भावना आती हैं.

मां शब्द संसार का सबसे छोटा और सबसे सुंदर शब्द है, उतना जिम्मेदारी वाला भी शब्द है, और जब बेटियां हमे माँ कहकर पुकारती हैं तब से हमारे पूरे दिन की शुरुआत खुशियों भरी होती हैं.

किसी भी कार्य को करने में चुनौतियां सामने आती हैं…
सोनिया का कहना है कि जब भी हम किसी कार्य को करते हैं तो कई बातें चुनौती के रूप में निकलकर सामने आती हैं, लेकिन सारी चुनौतियां का हम सामना करते हैं. यही हम अपनी बेटियों को भी समझाते हैं किहार को हराना हैं, और आगे बढ़ो, सोनिया जौली किसी भी से शासन-प्रशासन या उनकी योजनाओं से कोई भी मदद नहीं लेती हैं. जिले में जनप्रतिनिधियों के साथ साथ इनके इस कार्य की सराहना सामाजिक रूप से भी की जाती हैं.

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