वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियां नौकरियों में कर रही हैं बड़ी कटौती, क्या अब भी MNC के पीछे भागेंगे हमारे युवा?

सोशल मीडिया कंपनियों में इस समय छँटाई का जो दौर चल रहा है वह खेदजनक है। मेटा ने जिस तरह हजारों कर्मचारियों की छुट्टी की उससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। हटाये गये कर्मचारियों में ऐसे लोग भी हैं जो दो-तीन दिन पहले नियुक्त किये गये थे।

27 अक्टूबर को 44 अरब अमेरिकी डॉलर में ट्विटर को खरीदने वाले एलन मस्क ने इस सोशल मीडिया मंच पर बड़े सुधारों की घोषणा की है जिसको मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है। लेकिन उन्होंने जिस तरह कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की है उसकी आलोचना भी हो रही है। 39 करोड़ 60 लाख उपयोक्ताओं वाला यह सोशल मीडिया मंच आज के दौर में काफी महत्व रखता है क्योंकि निजी और सरकारी स्तर पर सूचनाओं के प्रसार के लिए ट्विटर का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ट्विटर पर विभिन्न हैशटैग के जरिये तमाम तरह के मुद्दे उठाये जाते हैं लेकिन आज ट्विटर खुद एक मुद्दा बन चुका है और इसका भविष्य भी अधर में नजर आ रहा है क्योंकि मस्क ने एक बयान में कह दिया है कि कंपनी दिवालिया भी हो सकती है। हालांकि ट्विटर के प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह मंच एक बार फिर से खुद को मजबूत कर और लोकप्रियता हासिल करेगा।

जहां तक ट्विटर के पुनर्गठन की मस्क की योजना की बात है तो यह शीर्ष अधिकारियों की छंटनी के साथ शुरू हुई। ट्विटर के वैश्विक कर्मचारियों में से ज्यादातर को ईमेल की गईं कि उनकी नौकरी खतरे में है या उनके कार्य स्वरूप में बदलाव किया जा रहा है। व्यापक रूप से चर्चित मेमो ने ट्विटर के कर्मचारियों को यह भी सूचित किया कि उन्हें ईमेल द्वारा अपने भाग्य का पता चलेगा। लेकिन मीडिया में आई रिपोर्टों के हिसाब से कुछ कर्मचारियों के ट्वीट से पता चला कि उन्हें ईमेल आने से पहले ही पता चल गया था कि उनके वर्क अकाउंट या अन्य आंतरिक प्रणालियों तक उनकी पहुंच को रोक दिया गया है। ऐसा ही हाल मेटा में देखने को मिल रहा है जिसने अब तक की सबसे बड़ी छंटनी की है। जो लोग कह रहे हैं कि एलन मस्क के आने से टि्वटर में लोगों की नौकरियां गयीं उन्हें यह भी देखना चाहिए कि मेटा में तो प्रबंधन में कोई बदलाव नहीं हुआ लेकिन उसके बावजूद नौकरियों में कमी करनी पड़ी है।

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देखा जाये तो वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियों में इस समय छँटाई का जो दौर चल रहा है वह खेदजनक है। मेटा ने जिस तरह हजारों कर्मचारियों की छुट्टी की उससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। हटाये गये कर्मचारियों में ऐसे लोग भी हैं जो दो-तीन दिन पहले नियुक्त किये गये थे। इनमें से कई तो किसी दूसरी बड़ी कंपनी को छोड़कर आये थे इसलिए अब उनका कॅरियर ही खतरे में पड़ गया है। यह सही है कि हर कंपनी को बाजार की स्थिति और मुनाफे को देखना होता है लेकिन कर्मचारियों के कॅरियर की परवाह भी की जानी चाहिए।

यही नहीं, ट्विटर और मेटा को जो फैसले करने पड़ रहे हैं। वह हाल में कई कंपनियों को करने पड़े हैं। स्वीडिश वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी क्लारना ने पिछले मई में 700 कर्मचारियों की छंटनी की और उन्हें इस संबंध में सूचित करने के लिए एक पूर्व-लिखित संदेश भेजा था जबकि एक अन्य कंपनी ने मार्च में ज़ूम पर 800 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। यही नहीं, मॉर्गेज कंपनी बेटर डॉट कॉम ने 2021 में जूम द्वारा 900 कर्मचारियों को बेमानी बना दिया, इसके एक साल बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी बर्ड ने 400 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त करने के लिए जूम वेबिनार का इस्तेमाल किया।

बहरहाल, हाल के महीनों में तकनीकी क्षेत्र में कर्मचारियों को हटाने का सिलसिला जिस तेजी से बढ़ा है वह सभी के लिए सतर्क रहने की चेतावनी भी देता है। यदि सही रणनीति के बगैर काम किये जायेंगे और खर्चों को बेतहाशा बढ़ा लिया जायेगा तो ऐसे ही हालात होंगे। साथ ही वैश्विक कंपनियों को भी सोचना होगा कि यदि उन्होंने ऐसा ही अनिश्चय का वातावरण बनाये रखा तो आज के युवा जो मल्टीनेशनल कंपनियों की ओर भागते हैं वह ऐसी नौकरियों से मुंह मोड़ने लगेंगे या उन पर अविश्वास करने लगेंगे तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रतिभावान कर्मचारी मिलने मुश्किल हो जायेंगे।

-गौतम मोरारका

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