मैनपुरी उपचुनाव: सपा और भाजपा दोनों कर रही हैं दलितों के समर्थन का दावा

उत्तर प्रदेश में मैनपुरी संसदीय सीट के लिए उपचुनाव में मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों दलित मतदाताओं के समर्थन का दावा कर रही हैं। मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।

मैनपुरी (उप्र)। उत्तर प्रदेश में मैनपुरी संसदीय सीट के लिए उपचुनाव में मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों दलित मतदाताओं के समर्थन का दावा कर रही हैं। मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।
राजनीतिक दलों के सूत्रों के अनुसार, इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख से अधिक मतदाता हैं जिनमें से 3.40 लाख से अधिक दलित मतदाता हैं। यह उपचुनाव पांच दिसंबर को होगा। यह उपचुनाव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के चलते कराया जा रहा है जो मैनपुरी से सांसद थे।

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इस उपचुनाव में सपा ने डिंपल यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है।
राजनीतिक दलों का दावा है कि मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में कुल दलितों में 1.20 लाख जाटव, कठेरिया (70,000), दिवाकर (80,000) और बघेल (80,000) मतदाता शामिल हैं।
मायावती की बसपा ने इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है और कांग्रेस भी इस उपचुनाव से दूर है। इसलिए यहां मुकाबला मुख्य रूप से सपा बनाम भाजपा के बीच है।
दोनों प्रतिद्वंद्वी पार्टियां इस मुकाबले में दलितों के समर्थन का दावा कर रही हैं।
अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि मुलायम सिंह यादव ने कभी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया और इसलिए मतदाता डिंपल यादव का समर्थन करेंगे और वह रिकॉर्ड अंतर से जीतेंगी।

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भाजपा नेताओं ने कहा है कि दलित समुदाय के मतदाता पार्टी के सुशासन और योजनाओं के कारण शाक्य का समर्थन करेंगे।
स्थानीय निवासी प्रियरंजन आशु ने कहा कि भाजपा के सुशासन से दलित समुदाय ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद सपा कार्यकर्ताओं द्वारा अवैध रूप से जमीन हड़पने से हमें राहत मिली है। सुरक्षा की भावना है और यह इस उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में जाएगा।’’
गौतम कुमार कठेरिया ने दावा किया कि 80 फीसदी दलित वोट भाजपा को जाएंगे।

हालांकि, शुभम सिंह जाटव ने कहा, ‘‘दलित उपचुनाव में सपा को वोट देंगे, जैसा कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में किया था। नेताजी दलितों के समर्थन से जीते थे और अब दलितों ने डिंपल यादव को वोट देने का मन बना लिया है ताकि वह नेताजी की विरासत को आगे बढ़ा सकें।’’
राजेश जाटव ने भी इसी तरह की बात करते हुए दावा किया कि उनका समुदाय सपा उम्मीदवार के लिए मतदान करेगा।
भाजपा के कुछ नेता दावा कर रहे हैं कि बसपा के पारंपरिक समर्थक भाजपा के पक्ष में आ गए हैं, जिससे समाजवादी पार्टी को झटका लगा है। उन्होंने दावा किया कि इससे भाजपा की मैनपुरी लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करने की संभावना बढ़ गई है।

भाजपा ने बृहस्पतिवार को किशनी में अनुसूचित जाति सम्मेलन आयोजित किया जिसमें केंद्रीय मंत्री एस पी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश के मंत्री असीम अरुण समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
भाजपा के ब्रज क्षेत्र के प्रमुख रजनीकांत माहेश्वरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जाटव समुदाय की महिलाओं सहित 10,000 से अधिक लोगों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा, सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं सहित जाटव समुदाय के लोगों ने भाग लिया। इससे पता चलता है कि बसपा के पारंपरिक मतदाताओं की पहली पसंद भाजपा बन गई है।’’
उन्होंने बताया कि यह बदलाव (दलितों का भाजपा की ओर झुकाव) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली क्रमश: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई गई विभिन्न लाभकारी योजनाओं के कारण हुआ है, जिसके तहत बिना किसी भेदभाव के दलितों के उत्थान के लिए उन्हें मुफ्त राशन, पक्का घर, पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।

माहेश्वरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि बिजली कनेक्शन और मुफ्त एलपीजी सिलेंडर उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने में मदद कर रहा है।
माहेश्वरी ने राज्य में भाजपा के सत्ता में आने से पहले लोग ‘‘गुंडों, भूमाफियाओं के आतंक’’ में जी रहे थे और महिलाओं को घर से बाहर निकलने में डर लगता था। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार के शासन में, महिलाओं और छात्राओं सहित समाज का हर वर्ग सुरक्षित महसूस करता है।
मैनपुरी उपचुनाव के तहत मतदान पांच दिसंबर को होगा जबकि मतगणना आठ दिसंबर को होगी।

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