मरीजों के डेटा रिकॉर्ड क्यों हैं हैकर्स के निशाने पर? AIIMS के बाद अब तमिलनाडु अस्पताल के 1.5 लाख मरीजों की जानकारी डार्क वेब पर

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CloudSEK के अनुसार, संवेदनशील डेटा को कथित रूप से एक समझौता किए गए थर्ड पार्टी को बेच दी है। इसमें वर्ष 2007-2011 के डेटा रिकॉर्ड हैं। डेटा की प्रामाणिकता का निरीक्षण करने के लिए हैकर्स ने संभावित खरीदारों के सबूत के तौर पर एक नमूना साझा किया।

दिल्ली एम्स में हुए साइबर अटैक से उबरने की प्रक्रिया जारी ही थी कि तमिलनाडु के एक अस्पताल को हैकरों ने निशाना बनाया है। तमिलनाडु के श्री सरन मेडिकल सेंटर के 1.5 लाख मरीजों के निजी डेटा को हैकर्स ने लोकप्रिय साइबर क्राइम फोरम पर बेचा गया और इसके साथ ही एक टेलीग्राम चैनल डेटाबेस बेचने के लिए इस्तेमाल किया गया। साइबर अटैक के बारे में जानकीर देने वाली फर्म CloudSEK द्वारा डेटा ब्रीच की खोज की थी।

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CloudSEK के अनुसार, संवेदनशील डेटा को कथित रूप से एक समझौता किए गए थर्ड पार्टी को बेच दी है। इसमें वर्ष 2007-2011 के डेटा रिकॉर्ड हैं। डेटा की प्रामाणिकता का निरीक्षण करने के लिए हैकर्स ने संभावित खरीदारों के सबूत के तौर पर एक नमूना साझा किया। लीक हुए डेटा में मरीजों के नाम, जन्मतिथि, पते, अभिभावकों के नाम और डॉक्टर के विवरण शामिल हैं।

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मरीजों के डेटा की कीमत

चुराए गए डेटाबेस को 100 डॉलर के लिए विज्ञापित किया जाता है। जिसका अर्थ है कि डेटाबेस की कई प्रतियां बेची जाएंगी। डेटाबेस का अनन्य स्वामी बनने के इच्छुक लोगों के लिए इसकी कीमत 300 डॉलर तक बढ़ा दी जाती है और यदि स्वामी डेटाबेस को फिर से बेचना चाहता है, तो इसकी कीमत 400 डॉलर हो जाती है।

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