मछली खाने के हैं दीवाने तो पहुंच जाएं सहरसा, देसी टेस्ट के हो जाएंगे दीवाने

मो. सरफराज आलम/सहरसा. अगर आपको मनचाही देसी मछली घरेलू स्वाद जैसा खाना हो तोआप सहरसा के बबलू की मछली दुकान पर चले आएं. यहां पर आपको एक से बढ़कर एक देसी मछली खाने को मिलेगा. इसके साथ-साथ आप मटन का भी आनंद ले सकते हैं. कहा जाता है कि अगर एक बार बबलू की दुकान से मछली का स्वाद लोग चख लेते हैं तो लोग दीवाना हो जाते हैं. यहां बनाई जाने वाली मछली का स्वाद ही अलग है. यहां एक दर्जन से अधिक प्रकार की मछलियां बनाई जाती है. जहां रोजाना लगभग 50 किलो से अधिक मछलियों की खपत आसानी से हो जाती है.

देसी मछली की रखते हैं कई वेराइटी

देसी मछली लेने के लिए बबलू अहले सुबह 3 बजे ही घर से निकल पड़ते हैं और विभिन्न जगहों से मछली खरीदते हैं. सहरसा रजिस्ट्री ऑफिस परिसर स्थित बबलू की मांसाहारी दुकान की. जहां मछली खाने वाले शौकीनों का दिनभर जमावड़ा लगा रहता है. इस दुकान में मछली खाने के लिए लोगों को लाइन में भी लगना पड़ता है.

बबलू की इस फेमस मछली-चावल की दुकान पर दर्जनों प्रकार की मछली हर वक्त उपलब्ध रहती है. जिसमें देसी सिंघी, मुंगरी, कबई, टेंगरा, झिंगवा, कतला, रेहू, इचना मछली के साथ मटन प्रतिदिन बनाता है. यहां मछली खाने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं. मछली में देसी स्वाद के चलते लोग बबलू की मछली दुकान पर खींचे चले आ जाते हैं.

50 kg मछली की रोज खपत

दुकानदार बबलू मुखिया ने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन 40 से 50 किलो मछली बनती है. शाम होते-होते पूरी मछली और चावल खत्म हो जाती है. दुकान सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक खुली रहती है. लोग जिस किस्म की मछली की डिमांड करते हैं, उसी किस्म की मछली को देसी अंदाज में बनाकर परोसा जाता है. वह भी महज 150 रुपए में. बबलू बताते हैं कि उनके यहां से बड़े – बड़े अधिकारी भी मछली खरीदकर ले जाते हैं.

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