बाराबंकी में शुरू हुआ ‘मिनी एनडीए’, जहां गूंजते हैं जय हिंद-भारत माता की जय के नारे

रिपोर्ट: संजय यादव

बाराबंकी. यूपी के बाराबंकी जिले में ग्रामीण स्तर पर अलग-अलग प्रतिभाओं से लबरेज छात्र-छात्राओं को निखारकर उनके भविष्य को संवारने के लिए प्राइमरी स्तर की आर्मी ट्रेनिंग एकेडमी खोली गई है. यह जिले का पहला ट्रेनिंग सेंटर है, जहां बच्चों को प्राइमरी स्तर पर भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मिशन भारत के तहत इस मिनी एनडीए को बनाने वाले डॉ. सैय्यद रिजवान अहमद का मकसद गांव के इन छोटे-छोटे बच्चों में देशभक्ति का जज्बा भरकर उन्हें सेना में कर्नल और ब्रिगेडियर जैसा बड़ा अधिकारी बनाना है.

मिशन भारत अकादमी राजधानी लखनऊ से करीब 60 किलोमीटर दूर बाराबंकी के सिद्धौर ब्लॉक के ममरखापुर गांव में बनाई गई है. मिशन भारत के अंतर्गत इस मिशन भारत अकादमी की स्थापना की गई है. जहां धूल-मिट्टी में खेलने वाले गांव के बच्चों में भारत का भविष्य तलाशने की पहल की गई है. इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े गांव के उन 11 बच्चों के भविष्य को संवारा जाएगा, जो यहां के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं. इनको यहां पढ़ाई के साथ ही खेल और दूसरी गतिविधियों में कुशल बनाकर सैन्य सेवाओं में जाने लायक बनाया जाएगा.

बड़ा होकर देश की सेवा करना
यहां चयनित किये गये सभी 11 बच्चे एक सैनिक स्कूल की तरह ही तैयारी करने में जुटे हैं. इन सभी बच्चों का सपना बड़े होकर देश की सेवा करना है. गांव में बनाई गई इस मिलिट्री ट्रेनिंग अकादमी का वातावरण और बच्चों व स्टाफ की वेशभूषा उनके सुनहरे भविष्य की ओर साफ संकेत भी दे रही है. मिलिट्री रंग का बच्चों और यहां के स्टाफ का पहनावा ही नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई के लिये बनाया गया कक्ष भी बंकर जैसा ही है, जोकि सैन्य सेवाओं की तैयारी के लिए एक मिनी एनडीए की तरह ही लगता है.

बच्चों को शारीरिक रूप से बनाया जा रहा मजबूत
बच्चे यहां भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद जय हिंद बोलकर सलामी देते हैं. इन बच्चों को शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाने के लिए एनसीसी, योग, फुटबाल, तीरंदाजी, फौजी ड्रिल और व्यायाम का कोच प्रशिक्षण देते हैं. आगे चलकर इन्हें तैराकी, घुड़सवारी, निशानेबाजी में भी प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाये जाने की तैयारी है. इन बच्चों को यहां अनुशासन और सम्मान के तरीके भी बताये जाते हैं.

बच्चों का लिया गया टेस्ट
इस मिनी एनडीए का सपना देखने वाले डॉ. सैयद रिजवान अहमद के मुताबिक, गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा दो पास करने वाले इन बच्चों को हमने यहां लेने से पहले इनका एक छोटा सा टेस्ट लिया. इनसे अंग्रेजी और हिंदी के कुछ प्रश्न पूछे गए. इसके आधार पर आनंद, अंश, विराज, रितम, चांदनी, रजनीश, साजन, आदित्य, विशाल, अनिक और विपिन का चयन किया गया है. इन्हें अवधेश, अभिषेक, नीलम और पूजा पढ़ाते और ट्रेनिंग देते हैं. यहां चलने वाली तीन घंटे की कक्षा में दो घंटे पढ़ाई और एक घंटे खेलकूद का प्रशिक्षण दिया जाता है.

फौजी ड्रिल और व्यायाम का कोच प्रशिक्षण देंगे
मिशन भारत अकादमी रोजाना शाम को चार से सात बजे के बीच यहां क्लास लगाई जाएंगी. जिसमें बच्चों को शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाने के लिए एनसीसी, योग, फुटबाल, तीरंदाजी, फौजी ड्रिल और व्यायाम का कोच प्रशिक्षण देंगे. कक्षा पांच के बाद उन्हें तैराकी, घुड़सवारी, निशानेबाजी में भी प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जाएगा. इन्हें कक्षा पांच, छह और आठ तीन बार सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा दिलाई जाएगी. जिससे यह बच्चे वहां सेलेक्ट हो सकें और इनका भविष्य संवर सके.

बच्चों को अच्छी तालीम औक ट्रेनिंग दी जा रही
एकेडमी में इन नन्हे-मुन्हे कैडेट्स को पढ़ाने और ट्रेनिंग देने वाले शिक्षकों का कहना है कि गांव के इन बच्चों के भविष्य को संवारने को लेकर वह मेहनत कर रहे हैं. उनका मकसद इन बच्चों को अच्छी तालीम और ट्रेनिंग के साथ अच्छा इंसान बनाना है. जिससे यह बड़े होकर सेना में अधिकारी बनें और देश की सेवा करें. वहीं अकादमी में आने वाले बच्चों में भी काफी उत्साह है. वह बड़े होकर सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं.

Tags: Barabanki News, Indian army

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