प्रतिभा, सुक्खू और अग्निहोत्री हैं हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल

कांग्रेस के लिए एक ऐसे नेता का मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में चुनाव करना चुनौतीपूर्ण है, जो पार्टी को आगे ले जाते हुए उसे एकजुट रख सके. पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की उनके नेता के चुनाव के लिए शीघ्र बैठक होगी.

वैसे तो प्रतिभा सिंह ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और वह विधायक भी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने राज्य भर में पार्टी के लिए व्यापक चुनाव प्रचार किया. वह फिलहाल मंडी से सांसद हैं. वह निवर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिले मंडी से लोकसभा उपचुनाव जीती थीं.

प्रतिभा सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत भी है, जिन्होंने चार दशक से अधिक समय तक प्रदेश में कांग्रेस की कमान संभाली थी.

पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि प्रतिभा सिंह को ज्यादातर विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो वीरभद्र सिंह के प्रति निष्ठावान रहे हैं. वीरभद्र सिंह लंबे समय तक इस पहाड़ी राज्य में कांग्रेस के निर्विवादित नेता रहे थे.

प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य भी शिमला ग्रामीण से विधायक निर्वाचित हुए हैं और वह भी मुख्यमंत्री पद के लिए आशावान हैं. हालांकि, कई लोग उन्हें इस शीर्ष पद के लिए बहुत कम उम्र का मानते हैं.

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नदौन से विधायक सुक्खू और हरोली के विधायक अग्निहोत्री भी शामिल हैं. दोनों को उम्मीद है कि पार्टी आलाकमान क्रमश: प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में उनके काम को ध्यान में जरूर रखेगा.

अग्निहोत्री ने दावा किया कि विधायक दल के नेता के रूप में पिछले पांच साल में उन्होंने विधानसभा में प्रमुखता से पार्टी का रुख रखा तथा सरकार के फैसलों का विरोध किया एवं भाजपा के ‘कुशासन’ को लोगों के सामने रखा. अग्निहोत्री ब्राह्मण नेता हैं, जबकि सुक्खू राज्य में प्रभावशाली ठाकुर समुदाय से हैं.

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौड़ भी मुख्यमंत्री पद के लिए आशावन हैं . वह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने पिछले कुछ सालों से गुटबाजी से जूझ रही पार्टी को एकजुट किया. वह बहुकोणीय मुकाबले में ठियोग सीट से चुनाव जीते.

कुछ महीने पहले राठौड़ की जगह प्रतिभा सिंह को पार्टी की हिमाचल प्रदेश इकाई का प्रमुख बनाया गया था.

मुख्यमंत्री पद के लिए आशावान छह बार की विधायक आशा कुमारी एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर इस बार चुनाव हार गये हैं.

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली रहे कई राज परिवारों का अब प्रभाव खत्म हो रहा है और उनमें से बस दो ही चुनाव जीत पाये हैं, जबकि दो पराजित हो गए हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से 13,860 वोटों के अंतर से जीते, जबकि अनिरूद्ध सिंह कसुम्पटी विधानसभा सीट से विजयी रहे. विक्रमादित्य रामपुर बुशहर के पिछले राजपरिवार से आते हैं. अनिरूद्ध सिंह का कोटि के पिछले राजपरिवार से संबंध है.

दूसरी तरफ, पूर्व मंत्री और छह बार की विधायक आशाकुमारी इस बार अपनी डलहौजी सीट से हार गयीं. कुल्लू के राजपरिवार से आने वाले हितेश्वर सिंह बांजर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गये.

बीजेडी के लिए एक बड़ा झटका यह रहा कि उसके आठ मंत्री चुनाव हार गये. हारे हुए नेताओं में सुरेश भारद्वाज और राकेश पठानिया भी शामिल हैं, जिन्हें क्रमश: शिमला शहरी से कसुम्पटी तथा नुरपुर से फतेहपुर स्थानांतरित कर दिया गया था.

निवर्तमान बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर समेत 12 कैबिनेट मंत्री थे. गोविंद सिंह ठाकुर, रामलाल मरकंडा, राजिंदर गर्ग, राजीव सेजाल, सरवीण चौधरी और वीरेंद्र कंवर भी चुनाव नहीं जीत पाए. 

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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