नोएडा की डिमांड लागू करे लिफ्ट एक्ट: बढ़ती घटनाओं से डरी शहर की आधी आबादी, 1000 से ज्यादा हैं सोसायटी

नोएडाएक घंटा पहले

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ग्रेटरनोएडा के एस्पायर सोसायटी की लिफ्ट में फंसा आठ साल का बच्चा लिफ्ट खोलने का प्रयास करता हुंआ।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा हाइराइज इमारतों का शहर है। यहां की आधी से ज्यादा आबादी इन इमारतों में रहती है। वो अभी डरी हुई है। इसकी वजह सोसायटी में लगी लिफ्ट है। बच्चों के लिफ्ट में फंसने की घटनाएं सामने आई है। इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही है। ये टेक्निकल फाल्ट है। जिस वजह से लिफ्ट फंस रही है। इनका प्रॉपर मेंटेनेंस तब होगा जब नोएडा में लिफ्ट एक्ट बनेगा।

नोएडा के एओए और आरडब्ल्यूए विगत कई सालों से लिफ्ट एक्ट की डिमांड प्राधिकरण से करते आ रहे है। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। हालांकि हाइराइज इमारतों के लिए स्ट्रक्चर ऑडिट पालिसी लागू की गई है। लेकिन इस पॉलिसी में लिफ्ट का कोई प्राविधान नहीं है।

नोएडा में लिफ्ट एक्ट को लागू करने की मांग।

नोएडा में लिफ्ट एक्ट को लागू करने की मांग।

नोएडा प्राधिकरण के चीफ आर्किटेक्ट प्लानर इश्तियाक अहमद ने बताया कि जिस से नोएडा ग्रेटर नोएडा में हाइराइज इमारतों बन रही है। यहां लिफ्टों की संख्या बढ़ी है। दोनों ही प्राधिकरण में लिफ्ट लागू होना चाहिए। ताकि लिफ्टों का प्रॉपर मेंटेनेंस हो सके। विशेषज्ञों की माने तो लिफ्ट में .001 प्रतिशत की खराबी भी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए काफी है।

लिफ्ट एक्ट में क्या हो सकता है नियम
स्ट्रक्चर ऑडिट पॉलिसी की तर्ज पर नोएडा में लिफ्ट एक्ट बनाया जा सकता है। हालांकि बिल्डिंग बॉयलॉज में इसके नियम और कानून पहले सी है। सीएपी इश्तियाक ने बताया कि लिफ्ट एक्ट लागू होता है तो इसके तहत कई नियम बनाए जाएंगे।

  • लिफ्ट की फ्रीक्वेंसी कितनी है यानी कितनी बार ऊपर नीचे जाती है इसकी रिपोर्ट देनी होगी।
  • लिफ्ट मेंटेनेंस कैसे और कौन सी कंपनी करेगी। एक रिपोर्ट प्राधिकरण में देनी होगी।
  • कितने साल बाद इसमें बदलाव करना होगा।
  • एक हाइराइज इमारत में कितने वेट और क्षमता की लिफ्ट लगेगी।
  • लिफ्ट के अंदर गार्ड और इमरजेंसी सिस्टम की व्यवस्था।
  • लिफ्ट में ऑक्सीजन सिलेंडर।
  • लिफ्ट इमरजेंसी फोन सिस्टम, अलार्म सिस्टम की व्यवस्था होनी चाहिए।
लिफ्ट में एआरडी लगाना हुआ अनिवार्य।

लिफ्ट में एआरडी लगाना हुआ अनिवार्य।

प्राधिकरण ने लिफ्ट एआरडी को लगाना किया अनिवार्य
लिफ्ट में हो रहे हादसों को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 2015 में सभी लिफ्टों में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस लगाना अनिवार्य कर दिया। बिना इसके लगाए बिल्डर कंपलीशन सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर सकता है। ये एक ऐसी डिवाइस है जो लिफ्ट को गिरने से रोकती है। यदि लिफ्ट का सॉफ्टवेयर फेल हो जाए तो ये डिवाइस दो फ्लोर के बीच लगी होती है जो ऑटोमेटिक एक कुशन के साथ बेस तैयार करती है। जिससे लिफ्ट रुक जाती है।

3 से 4 हजार रुपए लेने के बाद मेंटेनेंस जीरो
जिन सोसायटी में एओए है और जिनमें बिल्डरो ने एओए के हैंडओवर सोसायटी को नहीं किया है। दोनों ही जगह लिफ्ट मेंटेनेंस नाम मात्र के बराबर ही है। जबकि सोसायटी मेंटेनेंस के नाम पर दोनों ही सोसायटी वासियों से 3 से 4 हजार रुपए लेते है। यही वजह है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लोग रोजाना लिफ्ट फंस रही है। ज्यादातर सोसायटी वासियों का आरोप है लिफ्ट लगाने में मानकों का प्रयोग नहीं किया गया है। कई बार प्राधिकरण को शिकायत की जा चुकी है लेकिन एक बार भी प्राधिकरण ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

सेक्टर-46 गार्डन ग्लोरी सोसाइटी में लगी लिफ्ट आए होती रहती है खराब

सेक्टर-46 गार्डन ग्लोरी सोसाइटी में लगी लिफ्ट आए होती रहती है खराब

सोयायटी में लिफ्टों का हाल
सेक्टर-46 गार्डन ग्लोरी सोसाइटी है। इसमें 20 टावर है। प्रत्येक टावर में 19 फ्लोर है और टावर में 80 फ्लैट है। 1300 लोग इस सोसायटी में रहते है। ये सभी फिटआउट के आधार पर यहां रह रहे है। एओए बनी है लेकिन बिल्डर ने सोसायटी हैंडओवर नहीं की। प्रत्येक टावर में दो लिफ्ट है। 16 ऑपरेशनल है। जिनकी हालत खस्ता है। लोग डर के मारे सीढ़ियों का ही प्रयोग करते है। सोसायटी के एओए प्रैजिडेंट दुर्गेश सिंह बताते है कि लिफ्ट में पैनिक अलार्म सिस्टम, इंटर कॉम, कैमरे, सिक्योरिटी गार्ड के अलावा फायर एनओसी तक नहीं है। लिफ्ट चलते-चलते रुक जाती है जाम हो जाती है। कई हादसे हो चुके है।

गाजियाबाद में एसोटेक नेक्स्ट सोसाइटी की लिफ्ट में फंसी तीन बच्चियां

गाजियाबाद में एसोटेक नेक्स्ट सोसाइटी की लिफ्ट में फंसी तीन बच्चियां

आपको बताते है शहर में हाल तें हुए हादसे

  • ग्रेटर नोएडा में एस्पायर सोसाइटी के अपार्टमेंट में 8 साल का बच्चा 10 मिनट तक लिफ्ट में फंसा रहा।
  • ग्रेनो वेस्ट पैरामाउंट इनोशंस सोसायटी में 10 साल का बच्चा लिफ्ट में 45 मिनट तक फंसा रहा।
  • लॉ रेजिडेंसिया सोसायटी में दो महिलाएं समेत तीन लोग 20 मिनट तक फंस गए।
  • एसोटेक स्प्रिंग सोसायटी में 15 मिनट तक शख्स फंसा रहा।
  • साया जिओन सोसायटी में दो बच्चे लिफ्ट में फंसे।
  • प्रिस्टोन सोसायटी में पति और पत्नी दोनों लिफ्ट में फंस गए।
  • पाम ओलंपिया में सोसायटी में आधे में एक किशोर घंटे तक लिफ्ट में फंस गए।
नोएडा प्राधिकरण का प्रशासनिक खंड का कार्यालय

नोएडा प्राधिकरण का प्रशासनिक खंड का कार्यालय

शहर में 1000 सोसायटी है

नोएडा ग्रेटर नोएडा में 1000 सोसायटी है। जिसमें अधिकतर समस्या ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में है। यहां करीब 25 हजार लिफ्ट है। विशेषज्ञों ने बताया कि नोएडा में लगी अधिकांश लिफ्ट कोरिया और जापान की कंपनियों की है। जिसमें मेंटेनेंस के लिए कम से कम 72 घंटे में ही सर्विस प्रोवाइडर हो सकती है। यही वहज है कि लिफ्ट खराब होने के बाद उसे ठीक होने में काफी समय लग जाता है।

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