नालंदा में तैयार हुआ ऐसा पेंट जो जीवाणु और फंगस को तो रोकेगा ही, गर्मी की भी NO ENTRY

नालंदा. अब आपको केमिकल पेंट अपने घरों की दीवारों पर लगाने की जरूरत नहीं है. इन केमिकल पेंट के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था. सीलन, दुर्गंध जीवाणु रहित पेंट तैयार किया जा रहा है, वो भी देसी तरीके से. बिहार के नालंदा में पहली बार गाय के गोबर से पेंट बनाया जा रहा है.

बिहार के नालंदा जिले में इसकी शुरुआत एकंगरसराय प्रखंड स्तिथ तेलिया बीघा गांव में हुई. संजय कुमार ने गांव में ही छोटा सा यूनिट लगाकर पेंट बनाने का काम शुरू किया है. यह प्लांट खादी इंडिया द्वारा प्रधानमंत्री एंप्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम के तहत लगाया गया है. देशभर में इस उत्पाद को प्राकृतिक पेंट के नाम से नाम से जाना जा रहा है. नालंदा में प्राकृतिक पेंट की यह यूनिट बायो ऑर्गेनिक पेंट के नाम से चलाई जा रही है. फिलहाल यहां एक यूनिट लगाई गई है. दावा किया जा रहा है कि यह पेंट मानव जीवन के लिए हानिरहित तो है ही, पर्यावरण के भी अनुकूल है और सस्ता भी.

उत्पादक संजय कुमार ने बताया कि गाय के गोबर से बने पेंट को अष्ट लाभ का भी नाम दिया गया है. इसे पर्यावरण पूरक, जीवाणु रोधक, एंटीफंगल, भारी धातुओं से मुक्त, गंधहीन, उष्णता रोधक, विषरहित और किफायती बताया गया है. गाय के गोबर से बने पेंट जीवाणु और फंगस को रोकने में सक्षम है. इसके अलावा बाहरी गर्मी भी रोकता है. इसे बनाने में विषैले पदार्थों का समावेश नहीं किया गया एवं घरों में पेंट होने के उपरांत इससे किसी प्रकार की गंध भी नहीं आती है. इसके अलावा मार्केट में मिलने वाले रसायनिक पेंट से भी यह काफी किफायती दर पर उपलब्ध है. इन दिनों 24 घंटे में 4000 लीटर पेंट बनाने की क्षमता है, फिलहाल यहां 2000 लीटर पेंट हर दिन बन रहे हैं

संजय ने बताया कि पेंट बनाने के लिए गाय के गोबर को एजिटेटर में डाला जाता है फिर इसमें बराबर मात्रा पानी मिलाया जाता है. जिसके बाद इसे ट्रिपल डिस्क रिफाइनरी में डालकर सेलरी बनाई जाती है. सेलरी में टालक और कैल्शियम कंपोनेंट डालकर पेंट का बेस तैयार किया जाता है. जिससे इमल्शन और डिस्टेंपर बनाया जाता है. संजय कुमार बताते हैं कि घरों की दीवारों और फर्शों पर गोबर के लेप या उपचार की पुरानी भारतीय परंपरा से प्रेरित होकर एक अभिनव प्राकृतिक पेंट तैयार किया है.

यह पेंट दीवारों के लिए एक आदर्श सुरक्षा कवच बनता है. जलरोधक और टिकाऊ होता है. उपयोग के 4 घंटे बाद सूख जाता है तथा BIS मानकों द्वारा प्रमाणित है. फिलहाल इस यूनिट में गांव के कुल 4 लोगों को रोजगार दिया गया है. आसपास के गांव से गोबर की भी खरीदारी की जा रही है, जिससे पशुपालकों को भी लाभ पहुंच रहा है. 1 लीटर पेंट बनाने में करीब 30 से 40% गोबर का उपयोग होता है.

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FIRST PUBLISHED : December 09, 2022, 18:44 IST

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