देश-विदेश में उत्तराखंड का तेज पत्ता मचाएगा धूम, वन विभाग करेगा ब्रांडिंग, जानें खासियत

रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

नैनीताल. उत्तराखंड में तेज पत्ता बहुतायत में पाया जाता है. नैनीताल से लेकर पिथौरागढ़ तक कुमाऊं के कई जिलों में इसके पेड़ देखने को मिल जाएंगे. हालांकि नैनीताल के भी अधिकांश जंगलों में तेज पत्ते की बेतहाशा खेती होती है. जबकि बाजार नहीं मिलने की वजह से इसके पत्ते जंगलों में ही खराब हो जाते हैं. वन विभाग अब इन तेज पत्तों की ब्रांडिंग करेगा और इन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भेजा जाएगा.

पहाड़ में पाए जाने वाला तेज पत्ता मीठा और खुशबूदार होता है. कुमाऊं विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित तिवारी बताते हैं कि तेज पत्ते का वानस्पतिक नाम सिनेमोमम टेमेला है. इसे सूप और कई तरह की सब्जियों में जायका देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसकी पत्तियों को सुखाकर इस्तेमाल में लाया जाता है.

तेज पत्ते में होते हैं औषधीय गुण
तेज पत्ते में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. यह हाई ब्लड शुगर को कम करने में कारगर है. इसके अलावा यह शरीर के इम्यून सिस्टम को भी बढ़ाता है. यह गठिया, पेट दर्द और साथ ही गैस्ट्रिक समस्याओं को दूर करने में भी फायदेमंद है.

नैनीताल के मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं पीके पात्रो ने बताया कि तेज पत्ता उत्तराखंड में कई जगह पाया जाता है. पहाड़ के तेज पत्ते में ऑयल कंटेंट भी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है. वन पंचायत क्षेत्रों में ज्यादा होने की वजह से इनकी ब्रांडिंग की जानी है. इसके लिए वर्तमान में तेज पत्ते के पेड़ों के अधिक तादाद वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है. उस क्षेत्र के लोगों को पत्ते इकट्ठे करना और उसकी पैकेजिंग को लेकर ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके बाद इन्हें बाहर बेचा जाएगा, जिससे तेज पत्ते का सही इस्तेमाल भी हो सके और साथ ही यहां के काश्तकारों की आर्थिकी में भी बढ़ोतरी होगी.

Tags: Nainital news, Uttarakhand news

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