दिल्ली एम्स में 8 साल की ‘ब्रेन डेड’ बच्ची बचा गई 2 बच्चों की जिंदगी, परिवार ने दी अंगदान की मंजूरी, 24 घंटे में दूसरा केस

हाइलाइट्स

जागरुकता के अभाव में अक्सर परिवार के लोग अंगदान नहीं करते
भारत में 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 0.4 फीसद अंगदान
अंगदान कर चुकी रोली की कहानी सुन तैयार हुआ दूसरा परिवार

नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में 24 घंटे से भी कम समय में दूसरा मामला सामने आया है जिसमें एक परिवार ने ‘ब्रेन डेड’ घोषित आठ वर्षीय बच्ची के अंग दान कर दो बच्चों को नया जीवन दिया है. अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले, ‘ब्रेन डेड’ घोषित 18 महीने की बच्ची के परिवार के सदस्यों ने उसके अंगों को दान कर दिया, जिससे दो को नया जीवन मिला और दो अन्य बच्चों को दृष्टि मिली.

एम्स में न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉ दीपक गुप्ता ने न्यूज एजेंसी को बताया कि उत्तर प्रदेश के मथुरा की मानसी दो नवंबर को अपने घर में किसी ऊंची जगह से नीचे गिर गई थी. आठ वर्षीय बच्ची के मस्तिष्क को गंभीर क्षति हुई और 11 नवंबर को उसे ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया था. बच्ची के माता-पिता की सहमति से, उसके यकृत और एक गुर्दे को पांच साल के बच्चे में प्रतिरोपण किया गया, जिसका यहां यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान में उपचार किया जा रहा था. मानसी के कॉर्निया और हृदय के वाल्व को अन्य बच्चों में इस्तेमाल करने के लिए संरक्षित किया गया है.

अंगदान कर चुकी रोली की कहानी सुन तैयार हुआ दूसरा परिवार
उन्होंने कहा, ‘‘काउंसलिंग के दौरान मानसी के माता-पिता को रोली के अंगदान की कहानी के बारे में बताया गया, जिसके बाद उन्हें ‘ब्रेन डेड’ की अवधारणा और अंगदान की जरूरत समझ में आई.’’ छह वर्षीय रोली प्रजापति को बंदूक की गोली से घायल होने के बाद ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया था. उसके माता-पिता ने इस साल अप्रैल में उसके महत्वपूर्ण अंग-हृदय, यकृत, गुर्दे और कॉर्निया दान कर दिए थे.

जागरुकता के अभाव में अक्सर परिवार के लोग अंगदान नहीं करते

मानसी के मामले में, जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर और अंग पुन: स्थापन बैंकिंग संस्था, एम्स तथा राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) से एक टीम अंग प्राप्त करने और प्रतिरोपण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए एक साथ आई. डॉ गुप्ता ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र, एम्स आने वाले हफ्तों में कॉर्निया का प्रतिरोपण करेगा. उन्होंने कहा कि भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता का अभाव है. डॉ गुप्ता ने कहा कि अक्सर परिवार के लोग अंगदान से मना कर देते हैं, क्योंकि उन्हें इस बारे में पता ही नहीं होता. उन्होंने अंगदान के बारे में जागरूकता फैलाने की अपील की.

भारत में 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 0.4 फीसद अंगदान
भारत में प्रति दस लाख आबादी पर अंगदान दर 0.4 (दुनिया में सबसे कम) है। अमेरिका और स्पेन में वर्तमान में प्रति दस लाख जनसंख्या पर अंग दान दर 50 है. डॉ गुप्ता ने कहा कि नए नेतृत्व में, एम्स दिल्ली ने हाल के दिनों में अंग जुटाने की गतिविधियों में बदलाव किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले छह महीनों में अंग दान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

Tags: Delhi AIIMS, New Delhi news

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