छावला गैंगरेप-मर्डर केस पर बोले पूर्व CJI यूयू ललित- सबूतों से नहीं साबित हो रहा था आरोपियों का जुर्म

हाइलाइट्स

छावला गैंगरेप-मर्डर केस पर बोले पूर्व सीजेआई ललित
परिस्थिति जन्य साक्ष्यों से सिद्ध नहीं हो रहा था दोष
मामले में आरोपियों के दोष को लेकर स्पष्टता नहीं थी

नई दिल्ली. भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने रविवार को छावला मर्डर केस को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि हमारे पास जो तथ्य आते हैं सिर्फ उन्हीं पर विचार किया जाता है. इस केस में जो तथ्य सामने आए वो परिस्थितिजन्य साक्ष्य थे. संविधान पूरी तरह स्पष्ट है कि अगर व्यक्ति दोषी है तो तथ्यों को उसी ओर इशारा करना चाहिए. जब तक दोष पूरी तरह सिद्ध नहीं होता, तब तक परिस्थितिजन्य साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जा सकते. इस केस में भी साक्ष्य दोष सिद्ध नहीं कर पा रहे थे. इनसे उतनी स्पष्टता नहीं मिल रही थी.

गौरतलब है कि दिल्‍ली के छावला में साल 2012 में गैंगरेप और मर्डर हुआ था. इस केस के 3 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को बरी कर दिया था, जबकि आरोपियों को दिल्ली की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी सजा-ए-मौत को बरकरार रखा था. हाई कोर्ट ने उन्हें शिकार के लिए सड़कों पर भटकने वाला हैवान बताया था.

क्षत-विक्षत हालत में मिला था शव
जानकारी के मुताबिक, जिस लड़की की गैंगरेप और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी उसका शव हरियाणा के एक गांव के खेत में क्षत-विक्षत हालत में मिला था. उस पर चोट के कई निशान थे. ये चोटें कार के औजार और अन्‍य वस्‍तुओं से हमले के कारण आई थीं. दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी 2014 में तीन लोगों को 2012 में 19 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के लिए दोषी ठहराया और उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.

Tags: Gang Rape, Murder, Supreme Court



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