छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: जनम-दिवस के राजनीति अउ अर्थशास्त्र

अब्बड़ अकन तिहार म जनम-दिन के एक अउ तिहार होथे. अपन-अपन अर्थव्यवस्था के अनुसार जनम तारीख म जनम-दिन मनाय जथे. आजकल देखा सीखी बाय लागे वाले हालत हे. पावर के अनुसार ये तिहार के महत्व म घट-बढ़ होथे. पावर पइसा लाथे. बेवस्था देथे. कतको झन अपन जनम तारीख ल भुला जथें. कतको झन गठिया के रखथें. जनम तारीख पूछबे त साफ़ कहि देथें. नइ मालूम. ठउंका-ठउंका तारीख, महीना, साल नइ मालूम. अब आधार आगे.जनम तारीख अटल होगे. आधार म जनम तिथि लिखे होथे. दाई-ददा जागे जागे हें. स्कूल जनम प्रमाण-पत्र मांगथे. प्राइवेट स्कूल म नान नान लइका मन अपन जनम तिथि म चाकलेट बांटथें. बड़े हो के जनम-उत्सव मनाथें. नेता मन के जनम तिथि अखबार म छप जथे. उंकर जनम तिथि जग जाहिर हो जथे. जनम-दिवस तिहार म उन ल बधाई अउ आशीर्वाद खूब मिलथे. जे मनखे ल अपन बुता साधना रहिथें नेताजी मन उपर उंकर भक्ति- भाव उमड़थे. नेता मन के आरती होथे. उन ल भक्ति के अनुसार फल मिलथे.

महानता के गुनगान
नेताजी मन के जनम-दिन म राजनीति अउ अर्थशास्त्र के मौसम संगे संग होथे. उंकर समर्थक मीडिया म छा जथें. बड़े बड़े फोटू, कट-आउट ,बैनर, पोस्टर उंकर राजनीतिक वंशावली दोहराथें. अउ नेताजी महान हो जथे. उन्कर गुनगान होथे.जब चमक दमक अउ भीड़-भाड़ खूब दिखथे तब जनम-दिवस सफल माने जथे. पावर जनम-दिवस पावर शो के बढिया अवसर होथे. बैरी अउ मितान दुनो जय जय करथें. ठुड़गा रूख घलो उल्होथे. भीड़ राजनीतिक परभाव अउ दबाव बढ़ाथे. जतके जादा पावर वाले नेता होथें उंकर भेंट ओतके गरू रहिथे. राजनीति म पावर गेम प्रदर्शन जरूरी हे. भीड़ देख के नेताजी के मन के उत्साह अउ ताकत दुनो बाढ़थे. लछमी दाई मगन होथे. छप्पर फाड़ चढ़ोत्तरी आथे. इंकर जनम-दिवस मनाय ले बहुत झन मन ल रोजी मिलथे उंकर अर्थशास्त्र सम्हलथे.

समे (समय) होत बलवान
पावरफुल नेता अउ वुहू कोनो मंत्री होय तो सरकारी अधिकारी मन ल सेवा के भरपूर मउका मिल जथे. प्रदेश अउ जिला स्तर के अधिकारी मन ल नेता भक्ति के पुन्न अउ पुरस्कार मिलथे. ओखर तिर-तार म खड़े होके फ़ोटू खिंचवाय ले कई दिशा म कामर्स के दुआर खुलथे. पोजीशन सेट होथे. नेताजी मन के अर्थशास्त्र मजबूत होथे. भेंट म श्रद्धा पूर्वक लिफाफा के आना-जाना होथे. एखर से अधिकारी मन के भेंट-सामर्थ्य के ज्ञान अउ परीक्षा हो जथे. साज-सज्जा के खरचा अधिकारी मन चुटकी बजात कर देथें. कोनो गाय-गवाय के जिम्मा लेथें त कोनो बाजा बजवाय के अउ कोनो भीड़ सकेले के ठेका लेथे. हर बुता के ठेकादारी होथे.पूरा व्यवस्था सेट होथे. आवक-जावक के बेवस्था बने रहिथे. घर दुआर जगमग जगमग जगमगावत रहिथे. बजार म किसम-किसम के लें-देन होथे. हर प्रकार के नोट बजार के रनवे म खूब भागथे. एखर से अर्थव्यवस्था के तरलता साफ़ दिखथे. किसम-किसम के भोग-राग खाव-पियो, बस नेताजी के गुन गाओ के गुण गाओ.

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मध्य प्रदेश

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सुयश-गान
नेताजी के जनम-दिवस हो अउ सुन्ना म कोलिहा नरियाय ये कइसे हो सकत हे. भव्य कार्यक्रम के भव्य व्यवस्था म भासन-वासन, खाना-पीना, मौज मस्ती, नाच-गान सब होथे. नेताजी के गुन गव्इया नेता-भजन मंडली नेताजी के गुण गावत नइ थकें. नेताजी के जीवन-यात्रा के मधुर-गान, नाच म सब वर्णन आथे. कुरसी दउड़ म नेताजी के साम, दाम, दंड, भेद नीति के सुयश-गान मन मोह लेथे.

आँन लाईन प्रसारन
इंटरव्यू लेवइया मन के भीड़ लग जथे. टी.वी. म नेताजी के जनम-दिवस के आँन लाईन सीधा प्रसारन होथे. भव्य मंच म जब नेताजी दर्शन देथें तब जनाथे के खुद इंद्र देवता परगट होय हे. किसम-किसम के सरल-सरल राजनीतिक प्रश्न पूछे जथे.नेताजी परिवार सहित आँ लाईन होथे. द्दश्य-अद्दश्य म पावर गेम चलथे. चमचा मन भिखारी मन ल फल-फूल खवाथें. एक सेव खवा के आधा दर्जन फ़ोटू खिंचवाथें. एक केला गरीब मन ल दे के अनेक फ़ोटू खिंचवाथें. कोनो गरीब मन ल कपड़ा बांटथें. ये परोपकारी सत्र बाद म घलो होथे. श्रेष्ठ चम्मच /अनुयायी बने बर किसम-किसम के उदीम करे जथे. एखर से नेताजी खुश नेताजी होथें. नेताजी हाईकमान ल खुश करथे. हाईकमान खुश तो कुरसी सुरक्षित. जनता ल दान पुन्न के महिमा घलो दिखथे. लछमी दाई हे जिहाँ माया अउ मया हे वुहाँ ओखर बरनन कोन करे ? समरथ मनखे के अवगुन घलो समे म गुन बन जथे. समे संग नइ देय त सोना घलो पथरा हो जथे. समय बलवान होथे ओखर चमत्कार अलगे दिखथे. जेला छू देथे तिही सोन हो जथे. इही म रजनीति के जादू हे.

(शत्रुघन सिंह राजपूत छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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