छत्तीसगढ़ी म पढ़व- नेता के घर मं भंइस

कोनो मने-मन हांसत रहिथे, गदकत रहिथे तब कोनो कट्ठल के हांसथे, कोनो मंद-मंद मुसकुरावत रहिथे. हंसी के रहस्य के शोध करे जाए के हंसी आखिर आथे काबर? अब ए करा ओ रहस्य के बरनन नइ करे जात हे, नइते फेर लम्बा-चौड़ा पुरान बखाने ले पर जाही. कभू मौका मिलही तब ‘हंसी रहस्य उपर चरचा करबो.

हां त, अभी हंसी ला कलेचुप राखिहौं कान दे के सुनिहौ. मैं कोनो रेडियो अउ टीवी चैनल के उद्घोषक नोहवं जउन सीधा कोनो स्टेशन ले प्रसारित करथौं. जउन खबर मोर कान तक जेकर भी माध्यम ले मिले हे उही ला बतावत हौं, आंखी देखे हाल घलो नोहय. अब ये खबर ल पतिया हौ ते नइ पतियाहौ तउन तुंहर मन ऊपर हे. फेर बात हे सोलह आना सही. हां तब तइयार हौ ना सुने बर. तब ले सुनव-अब ए बात ला सबो झन जानत होहू के देश मं आज दूध के कतेक बड़े समस्या खड़ा होगे.एक सौ तैंतीस करोड़ के आबादी ला तो अब कोनो बराबर दूध पिला नइ सकय. कतको गाय, भइंस पाल-पोस लय, फेर दूध के पूरती नइ कर सकय ये संकट ला देख के कतको नेता, मंत्री, नौकरशाह, व्यापारी, उद्योगपति मन अपन-अपन घर मं गाय-भइंस पालना शुरू करे हे. अब सबो मंत्री, नेता, अफसर अउ बयपारी लालू परसाद अउ राबड़ी देवी तो नइ बन सकय, फेर कुछू होय ओ दूनो परानी देश ला एक संदेश जरूर दे हे के दूध के संकट ले देश ल उबारना हे, तब गाय भइंस ल पालना जरूरी हे. अब तो ओ मवेशी मन बर चारा लगबे करथे. जबरन लालू परसाद ल अनदेखना नेता, मंत्री, बयपारी, उद्योगपति अउ विरोधी दल वाले मन बदनाम कर दिस के चारा के खरीदे मं ओहर घोटाला कर दिस. अरे अपन पेट बर नहीं, मवेशी बर चारा खरीदी मं थोर-बहुत ऊंच-नीच कर दिस होही तेकर बर अतेक बवंडर. ओकर ले तो बड़े-बड़े घोटाला अउ भ्रष्टाचार आज करथे. कोनो इडी, सीबीआई अउ पुलिस के जवान ओ सरकार के कारिंदा मन इहां जाथे का.

मानुष जात अतेक हपसी हे, ओला खाना चाही, दूध चाही, दारू चाही, का-का नइ डकार डरे ओमन. एकर मन के पेट होथे घला. गाय, भंइस, भेड़, बकरी सबके दूध नइ पूर परत हे. महतारी मन घला अपन लइका मन ला अपन स्तन के दूध ला नइ पिया के इकरे दूध ऊपर आसरित हो जथे. जबकि डॉक्टर मन साफ-साफ कहिथे- बच्चा मन बर महतारी के दूध अमरित के समान होथे फेर ओ जकली-भकली मन ला कोन समझावय? कोन जनी काबर अपन दूध नइ पियावय तउन ला उही मन जानय. ककरो-ककरो मुंह ले अइसने उडऩछू खबर पाय हौं के अपन दूध पियाय ले ओकर मन के रंग, रूप अउ सुंदरता ऊपर आंच आथे. भाड़ मं जाय लइका फेर ए बाई मन के रूप मं कोनो परकार के आंच नइ आना चाही, अटल कुंवारी बने राहन कहिथे. अब ये तो अपन-अपन सोच-विचार हे. ककरो मामला मं दखलंदाजी देवइया हम कोन होथन?

महिला मन के दूध के ऊपर बात निकलिस तब मोला ओ दिन के सुरता आगे जब एक झन संपादक हा मोला बलाके कहिथे- अरे दाऊ, पढ़ तो ये खबर ला. ओ खबर ला पढ़के सट खागेंव, अपन हंसी ल रोक नइ सकेंव. अखबार के दफ्तर मं अउ सात-आठ जन बइठे राहयं तेमा छोकरी मन घला राहय. ओ संपादक मोला बलइस अउ डांटिस, चुप. मेहर अखबार ल पढ़े बर देहौं के हांसे बर. अब सब झन के नजर हमरे दूनो झन कोती होगे. कइसे का बात होगे, का खबर हे तेमा हांसत हे अउ बला के डांटत काबर हे? उही बात ला तुमन ला बतइया हौं, तेकरे सेती शुरू मं चेताय रेहेंव अउ अभी घला काहत हौं- हांसिहौ झन, कलेचुप सुनिहौ. बात मं कठल जाहौ तब रंग मं भंग हो जही, चारों कोती बगर जही, मोर फधीता हो जही.

हां तब सुनौ, बात तीस-पैंतीस साल पहिली के आय. ‘दैनिक ट्रिब्यून नांव के एक अखबार चंडीगढ़ ले निकलथे, इही मं ए अलकरहा फेर पुस्ट समाचार छपे रिहिसे. उहां कोनो गांव के माइलोगिन रिहिसे, ओहर बाल्टी-बाल्टी भर दूध देवत रिहिसे. ओकर स्तन ले दूध के निकलना थमबे नइ करत रिहिसे. तब घर वाला ओकर उही काम करय, बाल्टी ला ले के दता दय. ओ बाई, अउ ओकर घर वाला के इंटरव्यू छपे रिहिसे तेमा ए सबो के ब्यौरा रिहिसे. हे न मजेदार खबर. सोचथौं, अइसने कस कहूं हमर देश के माइलोगिन मन होगे तब तो दूध के समस्या अपने-आप सिरा (खत्म) हो जही. ये जउन संपादक रिहिस हे ना, अइसने असन रोचक खबर खोज-खाज के निकालय, थोकन अलग दिमाग के रिहिसे ओहर. ओकर संग काम करे मं मजा आवत रिहिसे. अब ये लोक मं नइ हे ओहर.

दूध के बात चलत हे, तब एक संगवारी बताथे- एक झन नेता हे तेकर ओ हर लंगोटिया संगवारी हे. ओहर इही दूध के दुख ला टारे खातिर एक ठन भइंस खरीदे हे. अब ओ भइंस अइसे हे के जबले खरीदे हे तब ले ठाठा के ठाठा हे. ओला सलाह दिस के कोनो एकाद ठन बिजार के बेवस्था कर ले तब कहूं तोर भंइस फरय ते फरय. ओ बैगा ओला बताय हे वो सबो उदीम कर डरे हौं. तब ओहर कहिथे- ‘चन्नी मं दूध दुहे अउ करम ला दोस दे तोर ये भंइस के भाग मं नइहे दूध पिये के न बदे हे, एला निकाल दे, जा हरियाणा, पंजाब उहां ले बने कोनो अच्छा नस्ल के गाय-भंइस बिसा के लान अउ दुह बने मडिय़ा के, हकन के पी घला परिवार समेत.

(परमानंद वर्मा छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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