चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में खत्म होगी बिजली की सब्सिडी ! ऊर्जा मंत्री ने दे दिये संकेत

हाइलाइट्स

मध्य प्रदेश में अभी 100 यूनिट बिजली बिल पर सब्सिडी का प्रावधान है.
अगर 100 यूनिट खपत करने पर 654 रुपए का बिल आता है तो 554 रुपए सब्सिडी सरकार भरती है
इससे राज्य सरकार को सालाना करीब 24 हजार करोड़ रुपए का बोझ उठाना पड़ता है

भोपाल. मध्य प्रदेश में अमीरों को बिजली बिल पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म करने की तैयारी है. ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने न्यूज़ 18 के साथ खास बातचीत में कहा है कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है. ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर की मानें तो सक्षम लोगों को सब्सिडी के दायरे से हटाया जाएगा. इतना ही नहीं खुद ऊर्जा मंत्री ने ये ऐलान किया है कि वो बिजली सब्सिडी नहीं लेंगे. तोमर ने बाकी सक्षम नेताओं से भी अपील की है कि वो बिजली सब्सिडी को छोड़ें.

ऊर्जा मंत्री के मुताबिक बिजली बिल पर अभी जो सब्सिडी दी जा रही है उसका बोझ सीधे तौर पर टैक्स पेयर को जाता है. जरुरतमंदों को बिल पर बिजली सब्सिडी मिले इसमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन जो लोग सक्षम हैं उन्हें तो पूरा बिल देना चाहिए. इस मामले पर राजनीति भी शुरु हो गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जैसे गैस सब्सिडी छोड़ने के नाम पर बीजेपी सरकार ने उसे खत्म करने की साजिश की, वैसे ही अमीरों की बिजली सब्सिडी के नाम पर पूरी सब्सिडी को खत्म करने की साजिश की जा रही है.

क्या है सब्सिडी का गणित ? 

मध्य प्रदेश में अभी 100 यूनिट बिजली बिल पर सब्सिडी का प्रावधान है. अगर कोई उपभोक्ता महीने में 100 यूनिट बिजली खपत करता है तो उसे 100 रूपए बिल ही देना पड़ता है. 100 यूनिट खपत के 654 रुपए बिल में से 554 रुपए सब्सिडी सरकार भरती है. एक आंकड़े के मुताबिक मध्य प्रदेश में बिजली बिल पर सब्सिडी की वजह से सरकार को सालाना करीब 24 हज़ार करोड़ रुपए का बोझ उठाना पड़ता है.  सरकार का इरादा बिजली सब्सिडी क्राइटेरिया को बदलने का है. जो उपभोक्ता टैक्स पेयर हैं उन्हें सब्सिडी के दायरे से बाहर किया जा सकता है.

क्यों उठा सब्सिडी का मुद्दा ? 

दरअसल हाल ही में राजधानी भोपाल के मिंटो हॉल में ऊर्जा विभाग का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस आयोजन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि उनके संज्ञान में आया है कि एक आईएएस अधिकारी का भी 100 रुपए बिजली बिल आया है. ये तो अजीब है. ऐसे लोगों से तो कम से कम पूरा बिल वसूल किया जाना चाहिए जो सक्षम हैं. उसके बाद से ही ये माना जा रहा है कि एमपी में अमीरों की सब्सिडी बंद हो सकती है.

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