ग्रामीणों के संघर्ष के आगे झुका रेलवे, इंटर कॉलेज में फिर शुरू होगी पढ़ाई

रिपोर्ट- नीरज कुमार

बेगूसराय. रेलवे के अधिकारियों को आखिरकार ग्रामीणों के आगे झुकना ही पड़ा. अब पूर्व मध्य रेलवे के द्वारा गढ़हरा में संचालित इंटर कॉलेज में दोबारा से स्कूल की घंटी की आवाज सुनाई देगी. छात्र पढ़ेंगे और अपना भविष्य संवार सकेंगे. इंटर कॉलेज को दोबारा शुरू करने के आदेश से इस क्षेत्र के अभिभावकों में हर्ष है. दरअसल बेगूसराय जिले के गढ़हरा में रेलवे का अपना इंटर कॉलेज है. यहां पहली कक्षा से लेकर इंटर तक की पढ़ाई होती थी. वर्षों से इस कॉलेज को पूर्व मध्य रेलवे संचालित करता था,लेकिन बाद में रेलवे के अधिकारियों ने इसे बंद करने का निर्णय ले लिया. इससे आसपास के ग्रामीण नाराज हो गए और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हुए इस कॉलेज को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे थे.

स्थानीय ग्रामीण रिटायर्ड शिक्षक मुकेश्वर प्रसाद वर्मा ने बताया कि साल 2018 में रेलवे के अधिकारियों ने अपने निरीक्षण में पाया कि उन्हें इस कॉलेज से फायदा नहीं हो रहा है. रेलवे के कर्मियों के बच्चे इस कॉलेज में नहीं पढ़ रहे हैं. इसके बाद इस इंटर कॉलेज को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई. इस प्रकिया को साल 2018 में शुरू किया गया. पहली कक्षा 1 से 8 तक में एडमिशन बंद कर दिया गया. बाद में अन्य कक्षाओं को बंद करते हुए 31 मार्च 2022 को स्कूल को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया. यह इंटर कॉलेज 1961 में शुरू किया था.

ग्रामीणों के संघर्ष के आगे झुका मंत्रालय

इंटर कॉलेज को बंद कर दिए जाने से आसपास के गांव के लोग नाराज हो गए. उन्हें यह चिंता सताने लगी कि अब उनके बच्चे कहां पढ़ने जाएंगे. लोगों ने बंद इंटर कॉलेज को शुरू कराने के लिए पहल शुरू की. इसके लिए ग्रामीणों ने समाज सेवा संघर्ष समिति गढ़हरा का गठन किया. संघर्ष समिति के बैनर तले स्थानीय शिक्षाप्रेमी और बुद्धिजीवियों ने अपनी आवाज को बुलंद की. बाद में ग्रामीणों के इस अभियान को तेघरा के पूर्व विधायक रामरतन सिंह, बेगूसराय के सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का भी सपोर्ट मिला. अब ग्रामीणों का संघर्ष सफल हुआ. जानकारी के मुताबिक, 1 अप्रैल 2023 से इस स्‍कूल में फिर से छात्रों का नामांकन शुरू हो जाएगा.

10 गांव के छात्र हो रहे थे पढ़ाई से वंचित

स्थानीय ग्रामीण प्रमोद सिंह, चंद्रभूषण कुमार, राजीव रंजन कुमार, मुकेश सिंह उर्फ बबलू, नितेश कुमार और अन्य ने बताया कि कॉलेज बंद होने के कारण आसपास के 8 से 10 किलोमीटर में बसे 10 गांव के छात्र पढ़ाई से वंचित हो गए थे. कई बच्चों का पढ़ाई का सत्र भी छूट गया. पूर्व रिटायर्ड शिक्षक मुकेश्वर प्रसाद वर्मा ने बताया कि इस कॉलेज के फिर से शुरू होने के बाद खासकर पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियां भी अब पढ़ सकेंगी.

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