गोरखपुर में सज गया तिब्बतियों के ऊनी कपड़ों का बाजार, 30 साल से जलवा बरकरार

गोरखपुर. अगर आप यहां के निवासी है तो ये खबर आपके लिए खास है. इस समय गोरखपुर में तिब्बतियों के ऊनी कपड़ों का बाजार सज गया है. जहां ग्राहकों की भारी भीड़ जुटने लगी है. वहीं तिब्बतियों ने ट्रेंडिंग कपड़ों के साथ अपनी दुकानों को आकर्षक रूप दिया है. लंबे समय से शहरवासियों की मांग पूरी कर रहा यह बाजार लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.

गोरखपुर का तिब्बती बाजार ठंड के कपड़ों के लिए काफी ज्यादा फेमस है. यहां हर साल ठंडी में नवंबरसे फरवरी तक लोगों का तांता लगा रहता है. वहीं, ये तिब्बती मार्केटग्राहकों की हर डिमांड को पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है. यह बाजार उनकी डिमांड पर अब तक पूरा खरा उतरा है, यही वजह है कि लोग तिब्बतियों के बाजार को खूब पसंद करते हैं. जिसको लेकर अब एक बार फिर से बाजार में रौनक बढ़ गई है.

शहर से लेकर ग्रामीण तक की भीड़
तिब्बती ऊनी कपड़ों का बाजार एक बार फिर अपने परंपरागत अंदाज में सज चुका है. जहां पर ग्रामीण अंचल से लेकर शहर तक के ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. यहां पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक और युवतियों से लेकर महिलाओं तक की हर डिमांड पूरी हो रही है. छोटे बच्चों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में ऊनी कपड़े मौजूद रहते हैं.

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उत्तर प्रदेश

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30 साल से लगातार ग्राहक आते हैं यहां 
शहर में इस बाजार की धाक यूं ही नहीं है. यह लगभग 30 वर्षों से भी ज्यादा समय से ग्राहकों की मांग पर खरा उतर रहा है. माल और शापिंग कांप्लेक्स के दौर में भी खुद की उपयोगिता एक नए अंदाज में साबित कर रहा है. कहने की जरूरत नहीं कि टाउनहाल मैदान में जाड़े के मौसम में मात्र चार महीने का यह बाजार गोरखपुर के लोगों की जरूरत बन गया है.

नवंबर माह से लेकर फरवरी माह तक लगता बाजार
तिब्बत बाजार हर वर्ष नवंबर माह के पहले सप्ताह में सजना शुरू हो जाता है. मध्य नवंबर तक यह पूरे अपने रंग में आ जाता है. साथ ही फरवरी माह के अंत तक इसकी रौनक बनी रहती है. उसके बाद यह लोग अपने मूल निवास स्थान पर लौटने लगते हैं.

घर जाने से पहले ही कर लेते है पूरी तैयारी
शहरों और प्रदेशों से आने के बावजूद हर वर्ष अपने निर्धारित समय से ऊनी कपड़ों का तिब्बती बाजार सज जाता है. यहां पर इसकी पुख्ता व्यवस्था है. फरवरी माह में वापसी से पहले ही अगले वर्ष नवंबर में लौटने की योजना बना लेते है. अपने समुदाय के लोगों की सर्वसम्मति से वह दो दुकानदारों के नाम तय कर लेते हैं, जिन्हें यहां पर पहले आकर बाजार सजाने की सरकारी औपचारिकता पूरी कर लेनी होती है. उनके ग्रीन सिग्नल के बाद ही बाकी दुकानदारों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है.

खुद बनाते हैं खाना और किराए के मकान में रहते हैं
इन दुकानदारों को सपरिवार चार महीने तक यहीं रहना होता है. ऐसे में रिहाइश का सभी पुख्ता इंतजाम करते हैं. कोई कमरा किराये पर लेकर रहता है. तो कोई दुकानदार पास में बने चंद्रलोक लाज में अपनी व्यवस्था करता है. आमतौर पर सभी दुकानदार हर बार एक ही मकान में रहते हैं. उन्होंने बाकायदा यहां के मकान स्वामियों से अपने रहने की व्यवस्था को लेकर करार भी कर रखा है.लंबे समय तक यहीं रहना होता है, इसलिए खाने की व्यवस्था भी अपनी खुद करते हैं. अपने खाने का सामान भी अपने साथ लेकर आते हैं.

इस बार ज्यादा बिक्री की है उम्मीद
ऊनी बाजार के कम्युनिटी प्रधान टेंपर अब्दुल ने बताया कि पिछले 30 सालों से यहां पर हमारे समुदाय के लोग आकर बाजार लगा रहे हैं. ऐसे में यह कह सकते है कि ऊनी कपड़ों में फैशन की शुरुआत करने वालों में हम सबसे आगे है. अपनी इस साख को बनाए रखने के लिए आज भी सतर्क रहते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया की पूरे चार महीने ग्राहकों को निर्बाध सेवा दे सकें.अन्य बाजारों से सस्ते दामों पर हम उन कपड़ा बेचते हैं.

लोगों की पहली पसंद बना तिब्बती ऊनी बाजार
गोरखपुर के लोगों के लिए यह तिब्बती उन्हीं बाजार पहली पसंद बन चुका है, क्योंकि यहां पर खरीदारी करने आए आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि इस बाजार की खासियत यह है कि यहां पर अन्य दुकानों की अपेक्षा सस्ते दामों पर अच्छे और फैशन दार ऊनी कपड़े मिल जाते हैं. मैं पिछले कई वर्षों से यहीं पर ठंडी के महीने में कपड़े लेने आता हूं. वही खरीदारी कर रही कुमारी जयंती ने बताया कि यहां पर महिलाओं बच्चों लड़कियों लड़कों के साथ-साथ बूढ़े लोगों के भी ऊनी कपड़े सस्ते और क्वालिटी दार मिल जाते हैं. इसलिए हम लोग यहीं से अपने परिवार वह अपने लिए कपड़ों की खरीदारी करते हैं. साथ ही यह बाजार हमारी पहली प्राथमिकता रहती है.

Tags: Gorakhpur news, Winter season

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