क्या चुनावों में मिलेगी बेनामी फंडिंग की अनुमति? सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार

ANI

वित्त मंत्रालय ने 7 नवंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधान सभा के आम चुनावों के वर्ष में उनकी बिक्री के लिए “15 दिनों की अतिरिक्त अवधि” प्रदान करने के लिए योजना में संशोधन के लिए एक अधिसूचना जारी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को चुनौती देने वाले मामले को सूचीबद्ध करेगा, जो राजनीतिक गलों को बेनामी फंडिंग की अनुमति देता है। याचिका का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने शीर्ष अदालत के समक्ष किया और कहा कि अधिसूचना पूरी तरह से अवैध है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि वह मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर याचिका में चुनावी बांड योजना को चुनौती दी गई है, जो राजनीतिक दलों के गुमनाम फंडिंग की अनुमति देती है। 

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वित्त मंत्रालय ने 7 नवंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधान सभा के आम चुनावों के वर्ष में उनकी बिक्री के लिए “15 दिनों की अतिरिक्त अवधि” प्रदान करने के लिए योजना में संशोधन के लिए एक अधिसूचना जारी की। गजट अधिसूचना में कहा गया है, “केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा के आम चुनावों के वर्ष में पंद्रह दिनों की अतिरिक्त अवधि निर्दिष्ट की जाएगी। सरकार ने 2018 में चुनावी बांड योजना को अधिसूचित किया। प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बांड एक व्यक्ति द्वारा खरीदा जा सकता है, जो भारत का नागरिक है या भारत में निगमित या स्थापित है। 

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बयान में यह भी कहा गया है कि एक व्यक्ति एक व्यक्ति होने के नाते या तो अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बांड खरीद सकता है। इस योजना के तहत बांड आम तौर पर जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में दस दिनों की अवधि के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं, जब केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है।  

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