करौली के रणगमां ताल में नहाने से दूर हो जाते हैं चर्म रोग, जानें आखिर क्या है इसकी वजह

रिपोर्ट : मोहित शर्मा

करौली. वैसे तो अक्सर आपने तालाब देखे होंगे, लेकिन करौली से 5 किलोमीटर की दूरी पर मंडरायल मार्ग पर बना रणगमां तालाब आज भी विशेष पहचान रखता है. इसमें बने भव्य झरोखे एवं चबूतरे आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. अरावली की पहाड़ियों के मध्य स्थित इस तालाब का स्वच्छ नीला जल सैलानियों को सहज ही आकर्षित कर लेता है. इस तालाब की खासियत यह है कि यहां आध्यात्मिकता की अनुभूति होती है. यहां का शांत एवं स्वच्छ वातावरण ऐसा है कि जो व्यक्ति यहां पर एक बार आ जाता है, वह फिर इस वातावरण को नहीं भुला पाता.

सेवानिवृत्त अध्यापक रमेश तिवारी बताते हैं कि पहाड़ियों से घिरे इस तालाब के पानी की खासियत यह है कि बरसात के मौसम में पहाड़ों की जड़ी बूटियों और वनस्पति से रिस-रिस कर आनेवाला पानी इस तालाब में मिल जाता है. इस कारण इस तालाब में नहाने से अलग ही निखार आता है और चर्म रोग दूर हो जाते हैं.

इस ऐतिहासिक ताल का निर्माण करौली के प्रतापी राजा प्रताप पाल द्वारा 18वीं शताब्दी के मध्य मराठों और करौली की सेना के बीच हुए भीषण युद्ध में वीरगति प्राप्त करनेवाले योद्धाओं और सैनिकों के तर्पण के लिए कराया गया था. इसी कारण स्थल का नाम रणगमां तालाब पड़ा. इसके चलते आज भी यहां लोग श्राद्ध पक्ष के अवसर पर हजारों की संख्या में तर्पण के लिए पहुंचते हैं.

रियासत काल की परंपरा के अनुसार सावन माह के प्रत्येक सोमवार को यहां पर विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में स्थानीय लोग भाग लेते हैं. वर्तमान समय में यह ऐतिहासिक धरोहर अनदेखी की मार झेल रहा है. यहां पर्यटकों के लिए पेयजल और सुलभ शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि प्रशासन द्वारा शौचालय का निर्माण काफी समय पहले करा दिया गया लेकिन अभी तक इसे चालू नहीं कराने के कारण लोगों को का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

Tags: Historical monument, Karauli news, Rajasthan news

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