इथियोपिया में 9 महीने बंधक रखा, अब घर पहुंचे: बोले- 16 घंटे काम कराते, खाने के लिए सिर्फ 3 रोटी-नमक, प्याज-लहसुन और मिर्च देते

आजमगढ़8 मिनट पहले

अफ्रीकी महाद्वीप के देश इथियोपिया में नौकरी करने गए आजमगढ़ के तीन लोगों को 9 महीने तक वहां बंधक बनाकर रखा गया। अब ये लोग छूटकर घर पहुंचे हैं। बंधक बनाए गए लोग जब आजमगढ़ पहुंचे तो दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। उन लोगों ने बताया कि 3 महीने के एग्रीमेंट पर उन्हें भेजा गया था। उन्हें इथियोपिया में बंधक बना लिया गया। 12 से 16 घंटे जबरन काम कराया जाता। खाने के लिए सिर्फ 3 रोटी, नमक, प्याज, लहसुन और मिर्च दी जाती। इतनी यातनाएं दी गईं कि जिंदगी भर उसे भूल नहीं सकता।

बंधक बनाकर रखे गए लोगों को खाने के लिए 3 रोटी, प्याज-नमक, लहसुन, मिर्च दी जाती थी।

बंधक बनाकर रखे गए लोगों को खाने के लिए 3 रोटी, प्याज-नमक, लहसुन, मिर्च दी जाती थी।

गाजियाबाद की कंपनी से भेजे गए थे
बंधक बने तीन लोगों में आजमगढ़ के वेलकुंडा के संजय कुमार मिश्र, चंदाभारी के राज बहादुर चौबे, जूड़ा रामपुर के संदीप सिंह थे। ये लोग गुरुवार शाम अपने घर पहुंच गए। ये लोग 9 मार्च 2022 को गाजियाबाद की प्रीत मशीनरी रोलिंग मशीन की ओर से इथियोपिया भेजे गए थे। थदास स्टील ने इनका वीजा बनवाया था। एग्रीमेंट के तहत इन लोगों को तीन महीने बाद तीन जून को वापस आना था, पर कंपनी ने इन लोगों के वीजा और पासपोर्ट को जब्त कर लिया था।

इथियोपिया में नौ महीने बंधक रहने के बाद संजय मिश्रा घर पहुंचे तो उनका दर्द छलक उठा। बोले- 16 घंटे जबरन काम कराया जाता था।

इथियोपिया में नौ महीने बंधक रहने के बाद संजय मिश्रा घर पहुंचे तो उनका दर्द छलक उठा। बोले- 16 घंटे जबरन काम कराया जाता था।

इस कारण इन लोगों को 6 महीने और बंधक बनाकर जबरन काम कराया गया। नौ महीने बाद अब वतन वापसी हुई है। संजय मिश्रा इस कंपनी में बतौर रोलिंग फोरमैन और बाकी दो लोग फिटर पद पर तैनात थे। पूरे देश से पांच लोग गए थे, जिनमें तीन आजमगढ़ के रहने वाले जबकि एक बलिया और एक छत्तीसगढ़ का रहने वाला है। सभी पांच लोगों की आज वतन वापसी हो गई है।

वतन पहुंचते ही छलका यातना का दर्द
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए संजय मिश्रा ने कहा कि हम लोग रोलिंग मिल की कमीशनिंग करने गए थे। वहां के मालिक ने हम लोगों से मिल की कमीशनिंग के बजाय प्रोडक्शन शुरू करा दिया। इस बारे में जब हम लोगों ने मना किया तो कैद कर लिया गया। इस बात की जानकारी परिजनों को दी तो दूतावास से संपर्क किया गया। वहां पर हम लोगों को जानवरों की तरह खाना दिया जाता था और कैद करके रखा गया था।

आजमगढ़ पहुंचे राजबहादुर चौबे ने कहा कि खाने के लिए कभी चटनी-रोटी तो कभी प्याज, नमक-रोटी मिलती थी।

आजमगढ़ पहुंचे राजबहादुर चौबे ने कहा कि खाने के लिए कभी चटनी-रोटी तो कभी प्याज, नमक-रोटी मिलती थी।

ऐसी यातनाएं दी कि अब सोचकर रूह कांप जाती है
12 से 16 घंटे काम कराया जाता था। जिस तरह की यातना दी गईं, उसे बयां करने में अब रूह कांप जाती है। हम लोगों को दवा, टूथपेस्ट और ब्रश तक के लिए परेशान किया गया। इस बारे में वहां के दूतावास से संपर्क किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

कभी चटनी-रोटी तो कभी प्याज-रोटी दी जाती
निजामाबाद के चंदाभारी के रहने वाले राजबहादुर चौबे की आंखों में बात करते समय आंसू आ गए। उनका कहना है कि हमारा जो उत्पीड़न वहां किया गया। उसे हम कह नहीं सकते। खाने में कभी चटनी-रोटी तो कभी प्याज-रोटी दी जाती थी। सिर्फ 3 रोटी, नमक, प्याज, लहसुन और मिर्च दी जाती थी। आज नौ माह बाद वतन वापसी हुई है। बहुत अच्छा लग रहा है।

आजमगढ़ में भंवरनाथ मंदिर पहुंचे संजय मिश्रा और राजबहादुर चौबे अपने परिजनों के साथ।

आजमगढ़ में भंवरनाथ मंदिर पहुंचे संजय मिश्रा और राजबहादुर चौबे अपने परिजनों के साथ।

6 अगस्त को लगाई थी गुहार, 8 को DM से मिले थे परिजन
इथियोपिया में बंधक आजमगढ़ के इन लोगों ने छह अगस्त को वीडियो जारी कर बंधक बनाए जाने की गुहार लगाई थी। इसके बाद 8 अगस्त को जिले के बंधक तीनों लोगों के परिजनों ने आजमगढ़ के DM विशाल भारद्वाज से मिलकर मदद की गुहार लगाई थी। आजमगढ़ के भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ से भी मदद की गुहार लगाई थी। सभी के प्रयासों से इथियोपिया से वतन वापसी हुई है।

8 अगस्त को परिजनों ने DM से मिलकर मदद की गुहार लगाई थी।

8 अगस्त को परिजनों ने DM से मिलकर मदद की गुहार लगाई थी।

अयोध्या दर्शन कर पहुंचे आजमगढ़
संजय मिश्रा का कहना है कि इथियोपिया में ही हम लोगों ने मन्नत मांगी थी कि जब वतन वापसी होगी तो पहले अयोध्या पहुंचकर भगवान श्रीराम और हनुमानजी का आशीर्वाद लेंगे। तब घर जाएंगे। गुरुवार सुबह ही हम लोग अयोध्या पहुंच गए। वहां हनुमान जी और श्रीराम जी का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। शाम छह बजे आजमगढ़ के भंवरनाथ में भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर सभी लोग अपने-अपने घरों को रवाना हुए। संजय मिश्रा का कहना है कि निश्चित रूप से आज हमारे घर भी खुशी का माहौल है।

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