अजमेर में पुजारी आत्मदाह के 5 दिन बाद भी सुलग रहे सवाल? मौत के बाद शुरू हुआ धरना खत्म, लेकिन अभी नहीं उठा शव, पढ़ें अब तक क्या हुआ?

अजमेर: राजस्थान केअजमेर में गंज थाना क्षेत्र की ऋषि घाटी स्थित जगन्नाथ मंदिर के 90 वर्षीय पुजारी के आत्मदाह के बाद शुरू हुआ विवाद शुक्रवार रात तक शांत नहीं हुआ। ब्राह्मण समाज और परिजन अपनी मांगों पर देर रात तक धरने पर बैठे रहे। हालांकि इसके बाद जिला प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियाें के बीच वार्ता हुई। तीन सूत्री मांगों पर सहमति भी बनी। लेकिन शव शुक्रवार रात को भी नहीं उठाया गया। इससे पहले धरना समाप्त कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपने की बात थी। लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुजारी का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। इसी बीच वो तमाम सवाल भी अभी ज्यों के त्यों है? मंदिर पुजारी को आत्मदाह के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा? पोते की बहू पर बुरी नजर के आरोपों का क्या? यहां पढ़ें, इस मामले की अब तक की पूरी कहानी…

4 माह से विवाद
गंज स्थित जगन्नाथ मंदिर के 90 वर्षीय पुजारी गोविंद नारायण शर्मा और मंदिर प्रबंधन समिति का पिछले 4 माह से विवाद चल रहा था। मंदिर प्रबंधन समिति ने दूसरा पुजारी रख दिया था जिसके बाद पुजारी ने कोर्ट की शरण ली। एक सप्ताह से इस मामले ने तूल पकड़ लिया था।

11 अक्टूबर: पुजारी ने लगाई खुद को आग
पुजारी गोविंद नारायण शर्मा ने 11 अक्टूबर को दिन में मंदिर में केरोसिन डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया था। इससे वह लगभग 50 फ़ीसदी तक झुलस गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया गया और उनके लिखे नोट के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

12 अक्टूबर: जांच अधिकारी को बदला
इस मामले में दूसरे दिन यानी 12 अक्टूबर को जांच अधिकारी बदल दिया था। गंज थानाधिकारी धर्मवीर सिंह से इस फाइल की जांच लेकर डीएसपी रणधीर सिंह को सौंप दी गई थी।
13 अक्टूबर: बिगड़ने लगी पुजारी की तबीयत
13 अक्टूबर की सुबह से ही पुजारी गोविंद नारायण शर्मा की तबीयत बिगड़ने लगी। जिससे पुलिस और प्रशासन की भी परेशानियां बढ़ती नजर आई। वहीं ब्राह्मण समाज भी लामबंद होना शुरू हुआ।

दिन में मृत्यु होने की जताई आशंका, रात में मौत
ब्राह्मण समाज ने केसरबाग चौकी के बाहर धरना शुरू किया और पुजारी की मृत्यु की आशंका भी जताई। शाम को एसडीएम मौके पर पहुंचे और ज्ञापन लिया साथ ही मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया। रात लगभग दस बजे चिकित्सकों ने पुजारी को मृत घोषित कर दिया।

14 अक्टूबर: शव नहीं उठाने पर अड़े
परिजन और ब्राह्मण समाज के लोग धरने पर बैठ गए और उन्होंने शव नहीं उठाने की बात प्रशासन के समक्ष रखी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक शव नहीं उठाएंगे।
ब्राह्मण समाज और अग्रवाल समाज की हुई वार्ता, रास्ता जाम
मामले का निस्तारण करने के लिए पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ब्राह्मण समाज और अग्रवाल समाज की सुबह वार्ता भी हुई। इस वार्ता का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका और ब्राह्मण समाज के लोगों का दिन भर चौकी के बाहर धरना चलता रहा। लगभग 4 बजे ब्राह्मण समाज के लोगों ने बजरंग गढ़ चौराहा जाम कर दिया जिसमें बड़ी संख्या में लोग फंसे रहे।

स्थाई तौर पर पुजारी रखने की बात पर सहमति
कोतवाली थाने में शाम को अग्रवाल समाज और ब्राह्मण समाज की एक समझौता वार्ता बुलाई गई। जिसमें अग्रवाल समाज ने पुजारी के परिवार को स्थाई रूप से पूजा करने का अधिकार देने की बात कही जिस पर ब्राह्मण समाज ने में सहमति दी। इसकी जानकारी अग्रवाल समाज के महासचिव सतीश बंसल और ब्राह्मण समाज के पंडित सुदामा शर्मा ने दी।

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मेडिकल बोर्ड से हुआ पोस्टमार्टम, लेकिन परिजनों ने नहीं उठाया शव
जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में मृतक पुजारी केशव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद परिजन को शव सुपुर्द करने की बात हुई। लेकिन देर रात तक परिजनों ने शव नहीं उठया।
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संघर्ष समिति लेगी दाह संस्कार का निर्णय
ब्राह्मण समाज के एडवोकेट योगेंद्र ओझा ने कहा कि अभी केवल स्थाई पुजारी रखने की बात पर सहमति बनी है और उन्होंने पोस्टमार्टम करवा लिया शव भी प्राप्त कर लिया है। अब प्रशासन से वार्ता के बाद संघर्ष समिति यह तय करेगी कि शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा या नहीं। अगर प्रशासन उनकी मुआवजे सहित अन्य मांगें नहीं मानेगा तो संघर्ष समिति आगे की रूपरेखा बनाएगी।
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आत्मदाह के पीछे की वजह?

ऋषि घाटी स्थित मंदिर के पुजारी गोविंद नारायण शर्मा और मंदिर प्रबंधन समिति के बीच विवाद चल रहा था। प्रबंधन समिति ने नए पुजारी को भी रख दिया था। वही पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए थे। आत्मदाह के समय लिखी चिट्‌ठी में मंदिर प्रबंधन समिति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने पोते की बहू पर बुरी नजर रखने का भी आरोप लगाया था।
रिपोर्ट- नवीन वैष्णव

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